
पाटन। ग्राम पंचायतों में 16वें वित्त आयोग की राशि के संचालन के लिए आईसीआईसीआई बैंक में खाता खोलने के पंचायत संचालनालय के निर्देश के बाद पाटन ब्लॉक में अब बैंकिंग प्रक्रिया को लेकर ही बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरपंचों का आरोप है कि बिना सरपंच-सचिव के KYC दस्तावेज और फोटो लिए पंचायतों के खाते कैसे खोल दिए गए? सोमवार को इसी मुद्दे को लेकर पाटन ब्लॉक सरपंच संघ ने जनपद पंचायत के सीईओ महेंद्र जांगड़े को चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
दरअसल पंचायत संचालनालय रायपुर द्वारा 15 सितंबर को जारी निर्देश के अनुसार दुर्ग संभाग की ग्राम पंचायतों के 16वें वित्त आयोग के अनुदान के संचालन के लिए आईसीआईसीआई बैंक में खाते खोलने के निर्देश दिए गए हैं। पाटन ब्लॉक में इस बैंक की कोई शाखा नहीं है। आईसीआईसीआई बैंक की शाखाओं के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को रिसाली, भिलाई अथवा दुर्ग जाना पड़ेगा। सरपंचों का कहना है कि इससे पंचायतों के नियमित बैंकिंग कार्यों में अनावश्यक दूरी, समय और आवागमन की समस्या पैदा होगी।
• सबसे बड़ा सवाल—KYC किसकी, दस्तावेज किसके?
जानकारी के मुताबिक सोमवार को आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारी पाटन जनपद कार्यालय पहुंचे और पाटन ब्लॉक की सभी 108 ग्राम पंचायतों के खातों की सूची एवं पासबुक लेकर पहुंचे। सरपंच संघ का कहना है कि किसी भी सरपंच अथवा सचिव ने बैंक में आवश्यक KYC दस्तावेज एवं फोटो उपलब्ध नहीं कराए हैं, इसके बावजूद पंचायतों के खाते खोले जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों ने सीधे सवाल उठाया है कि जब सरपंच-सचिव ने KYC दस्तावेज ही नहीं दिए, तो बैंक ने पंचायत के नाम पर खाता किस प्रक्रिया और किस दस्तावेज के आधार पर खोला? खाते के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता कौन है? KYC सत्यापन किस स्तर पर हुआ? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि ग्राम पंचायतों के खाते में 16वें वित्त आयोग की राशि का संचालन होना है। सरपंच संघ ने इस पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है।
• आदेश का पालन या पंचायतों की सुविधा की अनदेखी?
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासनिक आदेश का पालन अपनी जगह है, लेकिन पंचायतों के दैनिक संचालन और स्थानीय सुविधा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरपंचों ने पाटन में अन्य बैंको की उपलब्धता के साथ पंचायती राज अधिनियम की धारा 66(2) का हवाला देते हुए पंचायतों के बैंक खाते निकटतम सहकारी अथवा शासकीय बैंक में संचालित किए जाने की व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया है। पाटन में संबंधित बैंक की शाखा नहीं होने के कारण पंचायत प्रतिनिधियों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ेगा। इससे विशेषकर दूरस्थ ग्राम पंचायतों के लिए अतिरिक्त समय और खर्च का भार बढ़ने की बात सरपंच संघ ने कही है।
• प्रशासन और बैंक के सामने चार सूत्रीय मांग
पाटन ब्लॉक सरपंच संघ अध्यक्ष विनय चंद्राकर, रूपेंद्र शुक्ला, सचिव संघ अध्यक्ष प्रदीप चंद्राकर, नरेश राजपूत, सरपंचगण रवि सिंगौर, चन्द्रिका साहू, रमाकांत साहू, अर्चना यादव, जिधन ठाकुरसहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने जनपद अध्यक्ष कीर्ति नायक की मौजूदगी में जनपद सीईओ एवं बैंक अधिकारियों से चर्चा कर चार सूत्रीय मांग रखी। इनमें पाटन में आईसीआईसीआई बैंक की शाखा खोलने, जनपद पंचायत परिसर में पासबुक प्रिंटिंग मशीन लगाने, सरपंच-सचिवों का दुर्घटना बीमा कराने तथा पाटन में बैंक कियोस्क की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। सरपंच संघ ने कहा कि यदि तत्काल बैंक शाखा खोलना संभव नहीं है तो कम से कम कियोस्क के माध्यम से पंचायतों को स्थानीय स्तर पर आवश्यक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
बताया गया कि जनपद सीईओ महेंद्र जांगड़े ने पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों एवं समस्याओं से बैंक प्रबंधन को अवगत कराया है। वहीं मामला जिला पंचायत सीईओ के समक्ष भी रखा गया, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों को उच्चाधिकारियों के निर्देश का हवाला देते हुए तत्काल स्तर पर निर्णय लेने में असमर्थता जताई गई। अब सवाल यह है कि पंचायतों के लिए जारी बैंकिंग व्यवस्था केवल आदेश के पालन तक सीमित रहेगी या 108 ग्राम पंचायतों की जमीनी सुविधा, दूरी और दैनिक प्रशासनिक जरूरतों को भी इसमें शामिल किया जाएगा? पंचायत प्रतिनिधियों ने स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक समाधान की मांग की है।