
रायपुर, 20 अक्टूबर 2026। विजयादशमी के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री निवास में विधि-विधान से शस्त्र पूजा की। इस दौरान उन्होंने मां भगवती की आराधना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। शस्त्र पूजा के माध्यम से मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति की परंपरा का निर्वहन करते हुए शक्ति, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म की रक्षा का संदेश दिया।
‘शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्रचिन्ता प्रवर्तते’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शस्त्र पूजा के अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपना संदेश साझा करते हुए संस्कृत श्लोक ‘शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्रचिन्ता प्रवर्तते’ लिखा। इसका भावार्थ है कि सुरक्षित राष्ट्र में ही ज्ञान, शास्त्र और चिंतन की परंपरा फलती-फूलती है। मुख्यमंत्री का यह संदेश राष्ट्र की सुरक्षा के साथ ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है। विजयादशमी का पर्व शक्ति और सामर्थ्य के सदुपयोग के साथ सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मां भगवती से प्रदेश की खुशहाली की कामना
मुख्यमंत्री ने मां भगवती से प्रार्थना की कि उनके आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ विकास, सुशासन और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे। उन्होंने प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख-शांति, खुशहाली और सकारात्मकता बनी रहने की मंगलकामना की।
सनातन परंपरा में शस्त्र पूजा का विशेष महत्व
भारतीय संस्कृति में विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा की परंपरा शक्ति, साहस, आत्मरक्षा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के संकल्प से जुड़ी हुई है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। शस्त्र पूजा का संदेश है कि शक्ति का उपयोग सदैव सत्य, न्याय, समाज की सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए। मुख्यमंत्री निवास में शस्त्र पूजा के माध्यम से विजयादशमी की इसी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का निर्वहन किया गया।