YC न्यूज़ डेस्क | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में महिला आरक्षण से जुड़े ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के संशोधन ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रावधान है, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार ने इस विधेयक को पारित कराने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि इसी सत्र में बिल को मंजूरी मिल सकती है। संसद से पारित होने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी वर्ष होने वाले आम चुनावों में पहली बार इसका असर दिखाई देगा। प्रस्ताव के अनुसार महिला आरक्षण ‘वर्टिकल’ आधार पर लागू किया जाएगा। यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए निश्चित हिस्सेदारी तय होगी। यह व्यवस्था न केवल लोकसभा बल्कि राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर तथा पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू की जाएगी।
सरकार परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग से एक साधारण विधेयक भी लाएगी, ताकि नई सीटों का निर्धारण किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, सीटों का पुनर्निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। राज्यों के स्तर पर भी इस बदलाव का बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो सकती है, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं के लिए आरक्षित होगी। महाराष्ट्र में सीटें 48 से बढ़कर 72 होने का अनुमान है, जबकि बिहार, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और झारखंड जैसे राज्यों में भी महिला आरक्षित सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
भारत में महिला आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है। इसकी शुरुआत 1931 में हुई थी, जब स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस पर पहली बार चर्चा हुई। इसके बाद 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया गया, जिसे कई राज्यों ने बढ़ाकर 50% तक कर दिया। कुल मिलाकर, यह संशोधन देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नए स्तर पर ले जाने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।