जामगांव आर। दक्षिण पाटन क्षेत्र की सड़कों पर मालवाहक वाहनों में मजदूरों को ठूस-ठूसकर ढोए जाने का सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन स्थानीय थाना प्रभारियों की चुप्पी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिकअप, छोटा हाथी और माजदा जैसे वाहनों में रोजाना दर्जनों मजदूरों को जानवरों की तरह बैठाकर थाना क्षेत्रों के सामने से वाहन गुजर रहे हैं, फिर भी कार्रवाई न के बराबर है। रानीतराई, जामगांव आर और पाटन थाना क्षेत्र में यह अवैध गतिविधि खुलेआम चल रही है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मालवाहक वाहनों में यात्रियों को ले जाना दंडनीय अपराध है और राज्य सरकार ने इस पर स्पष्ट पाबंदी भी लगा रखी है, लेकिन पुलिस की ढिलाई से नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह वाहन अक्सर चौक-चौराहों और थानों के सामने से गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं। मजदूरों को ठूसकर भरे गए इन वाहनों में किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।।इस संबंध में पाटन एसडीओपी ए. के. लकड़ा ने कहा कि “मालवाहक वाहनों में यात्रियों का सफर पूर्णतः अवैध है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की गई है और आगे भी सख्त कार्रवाई होगी। सभी थाना प्रभारियों को इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।”
हालांकि, क्षेत्र में लगातार हो रही इस अवैध ढुलाई से यह सवाल उठ रहा है कि अगर निर्देश दिए जा चुके हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही? क्या थाना प्रभारी नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं या स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है?