रायपुर ! राष्ट्रीय महत्व की जनगणना 2027 को लेकर छत्तीसगढ़ में तैयारियां तेज हो गई हैं। नवा रायपुर स्थित जनगणना निदेशालय ने प्रशिक्षण प्रक्रिया और मैदानी कार्य की रूपरेखा तय कर ली है। लेकिन इस प्रक्रिया का असर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों पर पड़ सकता है, जहां 31 लाख से अधिक बच्चे अध्ययनरत हैं।
53 हजार शिक्षक निभाएंगे प्रगणक की भूमिका
प्रदेश के 30 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पदस्थ करीब 53 हजार शिक्षक मई 2026 से जनगणना के पहले चरण में प्रगणक के रूप में कार्य करेंगे। यह चरण सितंबर 2026 तक चलेगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा। प्रशासन का तर्क है कि वार्षिक परीक्षाएं मई तक समाप्त हो जाती हैं, इसलिए मौजूदा सत्र प्रभावित नहीं होगा। परंतु नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होते ही बड़ी संख्या में शिक्षकों के जनगणना कार्य में व्यस्त रहने से कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
• विशेषज्ञों की चिंता-
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर निरंतर शिक्षक-छात्र संवाद बेहद आवश्यक होता है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पहले से ही संसाधनों की कमी है। ऐसे में शिक्षकों की अनुपस्थिति से सीखने की गति धीमी पड़ सकती है और बुनियादी साक्षरता एवं गणितीय कौशल पर असर पड़ सकता है।
• पालकों की भूमिका होगी अहम
शिक्षा विभाग के अनुसार, इस दौरान पालकों को बच्चों की पढ़ाई पर अतिरिक्त ध्यान देना होगा। घर पर नियमित अभ्यास, होमवर्क की निगरानी और हिंदी, अंग्रेजी व गणित जैसे बुनियादी विषयों की पुनरावृत्ति आवश्यक होगी। जरूरत पड़ने पर सामुदायिक अध्ययन समूह या ट्यूशन की सहायता ली जा सकती है।
• संभावित वैकल्पिक व्यवस्था
जहां शिक्षकों की संख्या सीमित है, वहां क्लस्टर मॉडल, अतिथि शिक्षक, मल्टीग्रेड शिक्षण और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से पढ़ाई जारी रखने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। कुछ जिलों में चल रहे ‘रीडिंग कैंप’ और ‘लर्निंग एन्हांसमेंट’ कार्यक्रमों को भी मजबूत किया जा सकता है।
• प्रशिक्षण की विस्तृत रूपरेखा
फरवरी से प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू होगा।
- 2 नेशनल ट्रेनर → 60 मास्टर ट्रेनर
- 60 मास्टर ट्रेनर → 1100 फील्ड ट्रेनर
- 1100 फील्ड ट्रेनर → 53,000 प्रगणक (प्राथमिक शिक्षक) व 10,000 पर्यवेक्षक
जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल, जिनके पास मध्यप्रदेश का भी प्रभार है, नियमित रूप से तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।
• बड़ी कक्षाओं पर नहीं पड़ेगा असर
अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड और उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इस उद्देश्य से प्राथमिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। फिर भी आने वाले सत्र में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के समक्ष समन्वय और वैकल्पिक व्यवस्था की बड़ी चुनौती रहेगी।