
रायपुर, 11 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। गिरफ्तारी के बाद अब ED उन्हें अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है। रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के साथ ही प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शराब घोटाले की जांच पहले ही कई राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में अग्रवाल की गिरफ्तारी को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
2019 से 2022 के बीच कथित शराब घोटाले की जांच
ED के अनुसार, कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच की अवधि से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान शराब कारोबार में एक संगठित व्यवस्था के जरिए कथित तौर पर अनियमितताएं की गईं और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। ED ने इस मामले में करीब 2,883 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा किया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
वित्तीय लेनदेन और भूमिका को लेकर पूछताछ
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद ED कथित शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित अवैध धन के लेनदेन में उनकी क्या भूमिका थी और मामले से जुड़े अन्य लोगों के साथ उनका किस प्रकार संपर्क रहा। अदालत में पेशी के बाद रिमांड मिलने की स्थिति में ED उनसे मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत पूछताछ कर सकती है।
जांच में पहले भी सामने आ चुके हैं कई बड़े नाम
कथित शराब घोटाले की जांच के दौरान छत्तीसगढ़ के कई चर्चित राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास, तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया सहित अन्य नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियों की ओर से मामले में अलग-अलग चरणों में कार्रवाई और आरोपपत्र दाखिल किए जाने की बात सामने आती रही है।
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद फिर सुर्खियों में मामला
कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने जुलाई 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में लगातार चर्चा में रहा है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद शराब घोटाले की जांच एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर सुर्खियों में आ गई है।
गिरफ्तारी के बाद बढ़ सकती है सियासी बयानबाजी
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। शराब घोटाले को लेकर दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। अब ED की ताजा कार्रवाई के बाद सभी की नजरें रामगोपाल अग्रवाल की अदालत में पेशी, संभावित रिमांड और ED की आगे की जांच पर टिकी हैं।