रायपुर। छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड की हिंदी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का दावा सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नों का पर्चा वायरल होने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए Chhattisgarh Board of Secondary Education (CGBSE) ने सिविल और साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है और जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार 14 मार्च को 12वीं की हिंदी विषय की परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हो गई थी, लेकिन 15 मार्च को छात्र संगठनों ने सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने का दावा किया। आरोप है कि 13 मार्च की रात को एक व्हाट्सऐप चैनल पर हिंदी विषय के 15 सवाल भेजे गए थे, जो अगले दिन हुए परीक्षा के प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते हैं।
व्हाट्सऐप चैनल पर वायरल हुए सवाल
छात्र संगठन NSUI के अनुसार 13 मार्च की रात करीब 2:41 बजे ‘जीनियस एकेडमी ऑनलाइन’ नाम के एक व्हाट्सऐप चैनल पर दो पन्नों में लिखे 15 सवाल साझा किए गए थे। कुछ मिनट बाद उसी चैनल से यह संदेश भी भेजा गया कि “इसे भी देख लेना।” दावा किया जा रहा है कि वायरल सवालों का क्रम और विषय अगले दिन के प्रश्नपत्र से लगभग समान था। यह मामला सबसे पहले NSUI के छात्र नेता Puneshwar Lahre ने सोशल मीडिया पर उठाया, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया।
माशिमं कार्यालय का घेराव
सोमवार को NSUI कार्यकर्ताओं ने रायपुर स्थित माशिमं कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व NSUI के प्रभारी महामंत्री Hemant Pal और PTRSU अध्यक्ष पुनेश्वर लहरे ने किया। छात्रों ने बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बोर्ड सचिव ने दिया जांच का आश्वासन
घंटों चले हंगामे के बाद बोर्ड सचिव पुष्पा साहू ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उन्हें आश्वस्त किया। उन्होंने बताया कि मामले में सिविल और साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है और साइबर सेल के साथ मिलकर जांच की जा रही है। सचिव ने कहा कि आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
छात्रों की प्रमुख मांगें
छात्र संगठनों ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं—
- हिंदी पेपर लीक मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच।
- दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई।
- 12वीं हिंदी की परीक्षा रद्द कर पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित करना।
फिलहाल बोर्ड और पुलिस की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।