रायपुर, 12 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें भाजपा में शामिल होने का ऑफर दिया गया था। इस दावे के बाद प्रदेश की राजनीति में वार-पलटवार शुरू हो गया है। बघेल ने वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में यह दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था। उनके इस बयान के बाद सूबे से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
इस पर कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि “न तो छत्तीसगढ़ को भूपेश बघेल की आवश्यकता है और न ही भाजपा को।” उन्होंने इस बयान को महज सुर्खियों में बने रहने की कोशिश करार दिया। कश्यप ने कहा कि प्रदेश की जनता विकास और सुशासन के मुद्दों पर ध्यान चाहती है, न कि पुराने आरोप-प्रत्यारोप पर।
गौरतलब है कि सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस में एकजुटता को लेकर मंथन जारी है। वहीं पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप भी लगे हैं। ऐसे माहौल में बघेल का बयान राजनीतिक तापमान बढ़ाने वाला साबित हुआ है।
पीडीएस और नक्सल मुद्दे पर भी घिरी कांग्रेस
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत द्वारा पीडीएस दुकानों के खाली होने के आरोप पर भी मंत्री केदार कश्यप ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिन पर स्वयं प्रदेश को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं, वही अब सवाल उठा रहे हैं। कश्यप ने आरोप लगाया कि जो लोग पहले जिम्मेदार पदों पर थे, वही आज विपक्ष में बैठकर सरकार पर आरोप मढ़ रहे हैं।