CGPSC पेपर लीक: चार्जशीट में दावा- ‘पेपर डील’ में 3.13 करोड़ वसूले, पेट्रोल पंप पर जमा रकम; मैरिज पैलेस में बांटे प्रश्नपत्र

CGPSC पेपर लीक: चार्जशीट में दावा- ‘पेपर डील’ में 3.13 करोड़ वसूले, पेट्रोल पंप पर जमा रकम; मैरिज पैलेस में बांटे प्रश्नपत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट में अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए वसूलने और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य पदों पर चयन कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 50 से 60 लाख रुपए तक लिए गए। ED के अनुसार इस पूरे मामले में करीब 3.13 करोड़ रुपए वसूले गए। चार्जशीट में दावा है कि रकम बोरियाकला स्थित एक पेट्रोल पंप पर जमा कराई गई और परीक्षा से एक रात पहले डीडी नगर के एक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र और उत्तर की मुद्रित प्रतियां दी गईं।

डॉक्टर ने अभ्यर्थियों से वसूली रकम

ED की चार्जशीट के मुताबिक तुमगांव सरकारी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से रकम जुटाई। एजेंसी का दावा है कि इसमें से करीब 2.90 करोड़ रुपए चार-पांच किस्तों में बोरियाकला स्थित अग्रिमा फ्यूल्स पेट्रोल पंप के संचालक अनिल चंद्राकर के पास जमा कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार पेट्रोल पंप से रकम कथित मुख्य बिचौलिए उत्कर्ष चंद्राकर और तत्कालीन मुख्यमंत्री के तत्कालीन OSD चेतन बोरघरिया तक पहुंची। ED ने चार्जशीट में इस रकम के लेन-देन का मनी ट्रेल मिलने का दावा किया है।

परीक्षा से एक रात पहले मैरिज पैलेस में बांटे पेपर

ED के अनुसार 12 फरवरी 2022 की रात रायपुर के रिंग रोड-1, डीडी नगर स्थित सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में करीब 30 से 35 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। एजेंसी का दावा है कि यहां अभ्यर्थियों को परीक्षा में आने वाले प्रश्नपत्र और उनके उत्तर की मुद्रित प्रतियां उपलब्ध कराई गईं।

बारनवापारा के रिसॉर्ट में कराई गई विशेष तैयारी

चार्जशीट के मुताबिक मई 2022 में चयनित बताए जा रहे 25 से 40 अभ्यर्थियों को एसी बसों के जरिए बारनवापारा स्थित एक रिसॉर्ट ले जाया गया। ED के अनुसार वहां पहुंचने के बाद अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और पहचान पत्र जमा करा लिए गए। इसके बाद सक्सेस एकेडमी से जुड़े शिक्षक धर्मेंद्र साहू, परितोष जायसवाल और अविनाश वर्मा ने संभावित प्रश्नों वाली सामग्री के आधार पर अभ्यर्थियों की विशेष तैयारी कराई। एजेंसी का दावा है कि इसके बदले तीनों शिक्षकों को 5-5 लाख रुपए दिए गए।

परीक्षा से पहले रायपुर लाए गए अभ्यर्थी

चार्जशीट के अनुसार परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को रायपुर के फूल चौक स्थित होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में ठहराया गया। वहां से उन्हें अलग-अलग वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया। ED के मुताबिक कुछ अभ्यर्थियों का चयन नहीं होने पर उन्होंने उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया से रकम वापस करने की मांग की। चार्जशीट में दावा है कि कुछ अभ्यर्थी मुख्यमंत्री निवास तक भी पहुंचे थे। इसके बाद करीब 25 से 30 लाख रुपए वापस किए गए, जबकि कुछ अभ्यर्थियों की रकम वापस नहीं होने का दावा किया गया है।

रिश्वत की रकम को कर्ज बताने की कोशिश का दावा

ED ने 21 फरवरी 2025 को उत्कर्ष चंद्राकर, डॉ. विकास चंद्राकर और अंकित चंद्राकर के बीच हुए एक इकरारनामे को जब्त करने का दावा किया है। एजेंसी के मुताबिक इकरारनामे में अभ्यर्थियों से 3.13 करोड़ रुपए लेने, करीब 30 लाख रुपए वापस करने और 2.83 करोड़ रुपए बकाया होने का उल्लेख है। ED का आरोप है कि इस रकम को जमीन के कारोबार या व्यक्तिगत कर्ज के लेन-देन के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।

47.54 लाख रुपए की संपत्ति कुर्क करने का दावा

ED के अनुसार 21 सितंबर तक मामले में कुल 47.54 लाख रुपए की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। इसमें टामन सिंह सोनवानी से जुड़ी करीब 40.26 लाख रुपए और उत्कर्ष चंद्राकर की करीब 7.27 लाख रुपए की अचल संपत्ति शामिल होने का दावा किया गया है। इसके अलावा जांच एजेंसी ने 9.32 लाख रुपए नकद जब्त किए हैं। इनमें उत्कर्ष चंद्राकर से 8.45 लाख रुपए और चेतन बोरघरिया से 87 हजार रुपए मिलने का दावा है।

उत्कर्ष के खाते में 99 बार में 72.18 लाख रुपए जमा

ED की जांच के मुताबिक उत्कर्ष चंद्राकर के बैंक खाते में 99 अलग-अलग लेन-देन में कुल 72.18 लाख रुपए जमा हुए। एजेंसी का दावा है कि यह रकम अभ्यर्थियों से वसूले गए पैसों का हिस्सा थी। वहीं चेतन बोरघरिया के Axis Bank, ICICI Bank, IDFC First Bank और HDFC Bank खातों में जून 2020 के बाद कुल 71.15 लाख रुपए जमा होने की बात चार्जशीट में कही गई है। ED के मुताबिक जुलाई 2022 में उत्कर्ष ने चेतन के बैंक खाते में 10 लाख रुपए ट्रांसफर किए।

CSR के जरिए 45 लाख रुपए मिलने का भी जिक्र

जांच में ग्रामीण विकास समिति का प्रबंधन तत्कालीन PSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और उनके परिवार से जुड़ा होने का दावा किया गया है। चार्जशीट के अनुसार उनकी पत्नी डॉ. पद्मिनी सिंह सोनवानी समिति की अध्यक्ष थीं, जबकि तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर कोषाध्यक्ष थे। दोनों समिति के संयुक्त अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बताए गए हैं। ED के मुताबिक समिति को CSR के तहत 45 लाख रुपए मिले थे। एजेंसी ने कंपनी अधिकारी हर्षा रूंगटा के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि इसके लिए शुरुआत में कोई लिखित आवेदन नहीं दिया गया था।

नोट: उपरोक्त आरोप और वित्तीय लेन-देन संबंधी दावे ED की चार्जशीट/जांच में बताए गए हैं। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों और संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद होगा।

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