रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार को करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई पर जेल के बाहर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और जमकर आतिशबाजी की।
जेल से बाहर आने के बाद चैतन्य बघेल ने कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक द्वेष और बदले की भावना से कार्रवाई की गई। उन्होंने न्यायालय का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं होता।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद कार चलाकर रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे और बेटे को रिसीव किया। भूपेश बघेल ने कहा कि ED, IT और EOW जैसी एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्य से दुरुपयोग आज उजागर हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे की गिरफ्तारी एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि चैतन्य की रिहाई उसके बेटे के जन्मदिन के दिन हुई है, जबकि ED ने चैतन्य के जन्मदिन पर गिरफ्तारी कर परिवार की खुशी में खलल डालने की कोशिश की थी। “आज हमारे लिए बेहद खुशी का दिन है।
जमानत की शर्तें और बचाव पक्ष का पक्ष
चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद चैतन्य को जमानत दी है। उन्हें EOW मामले में 2 लाख रुपए और ED मामले में 1 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है। रिजवी ने आरोप लगाया कि चैतन्य की गिरफ्तारी जबरन बनाए गए सबूतों के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि चैतन्य बघेल की संलिप्तता या घोटाले से किसी तरह के व्यक्तिगत लाभ का कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
ED-ACB की कार्रवाई और आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को जुलाई में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत गिरफ्तार किया था, जबकि सितंबर में भ्रष्टाचार के मामले में ACB/EOW ने उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और करीब 1,000 करोड़ रुपए के लेन-देन में उनकी भूमिका रही। वहीं ACB का दावा है कि उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए का हिस्सा मिला और घोटाले की कुल रकम 3,200 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है।
हाईकोर्ट की सख्ती, DGP को फटकार
शराब घोटाला केस में हाईकोर्ट ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे “कानून का गंभीर उल्लंघन” बताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने जांच में ‘चुनिंदा कार्रवाई’ की नीति अपनाने पर भी सवाल उठाए।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
चैतन्य बघेल की रिहाई के साथ ही राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध की हार बता रही है, जबकि जांच एजेंसियां आरोपों पर कायम हैं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।