
जिला जज होंगे अध्यक्ष; महिला विधायक और महिला सामाजिक कार्यकर्ता की भागीदारी अनिवार्य
रायपुर। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में बोर्ड ऑफ विजिटर्स का गठन किया है। जेलों में सुधारात्मक गतिविधियों की निगरानी, बंदियों की शिकायतों की सुनवाई और जेलों में उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा इस बोर्ड की प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बताया कि बोर्ड के जरिए जेलों में बंदियों के कल्याण और पुनर्वास से जुड़े कार्यों की निगरानी को और प्रभावी बनाया जाएगा।
जिला जज होंगे बोर्ड के अध्यक्ष
हर जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। जिला दंडाधिकारी (कलेक्टर) और जिला पुलिस अधीक्षक बोर्ड के सदस्य होंगे। इसके अलावा जिला स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता और साक्षरता कार्यक्रम से जुड़े जिला शिक्षा अधिकारी को भी सदस्य बनाया गया है।
तीन विधायक होंगे सदस्य, एक महिला विधायक जरूरी
बोर्ड में विधानसभा के तीन सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। इनमें कम से कम एक महिला विधायक का होना अनिवार्य किया गया है। इन विधायकों का नामांकन राज्य सरकार समय-समय पर करेगी। इसके साथ ही राज्य मानव अधिकार आयोग के एक नामित प्रतिनिधि को भी बोर्ड में सदस्य बनाया गया है।
दो सामाजिक कार्यकर्ताओं में एक महिला अनिवार्य
जिले के दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी बोर्ड में सदस्य बनाया जाएगा। इनमें कम से कम एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता का होना जरूरी है। शासन के आदेश के अनुसार ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनकी जेल प्रशासन, बंदियों के कल्याण और सुधारात्मक गतिविधियों में विशेष रुचि हो।
रोजगार और पुनर्वास पर भी रहेगा फोकस
बोर्ड में जिला रोजगार अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी और जिला उद्योग अधिकारी को भी सदस्य बनाया गया है। इससे जेलों में बंदियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण, कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों की समीक्षा एक ही मंच पर की जा सकेगी।
ट्रेनिंग और जेल सुविधाओं की होगी समीक्षा
बोर्ड का प्रमुख दायित्व जेलों में संचालित सुधारात्मक कार्यों की निगरानी करना होगा। बंदियों को दी जा रही ट्रेनिंग की गुणवत्ता, उसके परिणाम और जेलों में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। बोर्ड जेलों में सुधार के लिए नए उपायों और सुझावों पर भी काम करेगा।
व्यक्तिगत और सामूहिक शिकायतों पर होगी सुनवाई
बोर्ड बंदियों की व्यक्तिगत और सामूहिक शिकायतों की भी समीक्षा करेगा। शिकायतों पर जेल प्रशासन के साथ चर्चा कर उनके समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जेलों में बंदियों की समस्याओं के समाधान, उनके अधिकारों और कल्याण से जुड़े मामलों की निगरानी को मजबूत करना है। सरकार के इस कदम से जेल प्रशासन में न्यायिक निगरानी, जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ने के साथ बंदियों के सुधार और पुनर्वास की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।