पाटन ब्लॉक की पंचायत भवनों मे बिजली गुल : जामगांव आर, सेलुद सहित कई पंचायतों के कनेक्शन काटे गए-सरपंच संघ अध्यक्ष रूपेंद्र ने 12 को पाटन में सभी सरपंचों की बैठक बुलाई

पाटन ब्लॉक की पंचायत भवनों मे बिजली गुल : जामगांव आर, सेलुद सहित कई पंचायतों के कनेक्शन काटे गए-सरपंच संघ अध्यक्ष रूपेंद्र ने 12 को पाटन में सभी सरपंचों की बैठक बुलाई

पाटन। ग्राम पंचायतों के वर्षों से लंबित बिजली बिल का खामियाजा अब पंचायत भवनों को भुगतना पड़ रहा है। बकाया बिजली बिल की वसूली को लेकर विद्युत विभाग ने पाटन ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों के पंचायत भवनों के बिजली कनेक्शन काट दिए हैं। शुक्रवार को सीएसपीडीसीएल के कर्मचारियों ने विभागीय आदेश का हवाला देते हुए जामगांव आर, सेलुद सहित अन्य पंचायतों के कनेक्शन काटे। बिजली कटौती के बाद पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी है। सरपंचों का कहना है कि पंचायत भवनों में बिजली नहीं होने से रोजमर्रा के शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान में पंचायतों का अधिकांश काम ऑनलाइन पोर्टल, कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से संचालित होता है। ऐसे में बिजली कनेक्शन कटने से आम लोगों से जुड़े कार्यों के साथ ही पंचायत के प्रशासनिक कामकाज पर भी सीधा असर पड़ रहा है।

पाटन ब्लॉक सरपंच संघ अध्यक्ष रूपेंद्र शुक्ला ने कहा कि पंचायतों पर बिजली बिल की बड़ी राशि कई वर्षों से लंबित है। कई मामलों में यह बकाया 10 से 15 वर्षों पुराना है। वर्तमान में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए इतनी बड़ी राशि अपने स्तर पर चुकाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पंचायतों के पुराने बकाये के लिए शासन को स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि वर्तमान जनप्रतिनिधियों पर पुराने बकाये का भार न पड़े। शुक्ला ने कहा कि एक ओर देश और प्रदेश को डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जाने की बात कही जा रही है, वहीं पंचायत भवनों की बिजली काटे जाने से ऑनलाइन शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि पंचायत भवनों के बाद गांवों की स्ट्रीट लाइट और नल-जल योजनाओं के मोटर पंपों के बिजली कनेक्शन भी काटे गए तो ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और प्रकाश व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली समस्या की जिम्मेदारी किसकी होगी?

• करोड़ों के सरकारी बिजली बिल का मामला

जानकारी के अनुसार, जून 2026 तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी विभागों पर करीब 3035 करोड़ 37 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया बताया गया है। इसमें नगरीय प्रशासन तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित बकाया भी बड़ी राशि में है। इसी बीच 1 अगस्त 2026 से ब्लॉक स्तर और उससे ऊपर के सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू किए जाने के बाद बिजली वितरण कंपनी पुराने बकाये की वसूली पर भी जोर दे रही है। सरपंच संघ का कहना है कि पंचायतों के पुराने बिजली बिलों के निपटारे के लिए शासन को विशेष वित्तीय व्यवस्था करनी चाहिए। संघ ने प्रशासन से पंचायतों को आवश्यक राशि उपलब्ध कराने और बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई पर तत्काल समाधान निकालने की मांग की है।

• शनिवार को पाटन में जुटेंगे ब्लॉक के सरपंच

रूपेंद्र शुक्ला ने बताया कि पंचायतों की बिजली कटौती और पुराने बकाया बिल के समाधान को लेकर शनिवार को पाटन में ब्लॉक के सभी सरपंचों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पंचायतों के हित में उचित दिशा-निर्देश जारी कर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो सरपंच संघ आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।

• रमन सरकार में विशेष अनुदान से मिली राहत; अब किश्तों में भुगतान और प्रीपेड व्यवस्था पर जोर

गौरतलब है कि पूर्व में डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल मे ग्राम पंचायतों एवं आश्रित गांवों की स्ट्रीट लाइट तथा नल-जल योजनाओं के बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अनुदान दिए जाने की व्यवस्था की गई थी। वहीं वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार द्वारा स्थानीय निकायों के पुराने बिजली बकाये को व्यवस्थित करने तथा भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किश्तों में भुगतान और प्रीपेड स्मार्ट मीटर जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है।

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