छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : कवासी लखमा पर शिकंजा कसा, ED ने रायपुर बंगला और सुकमा कांग्रेस कार्यालय अटैच किया…

रायपुर/सुकमा-छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री कवासी लखमा, उनके बेटे हरीश लखमा और कांग्रेस के सुकमा जिला कार्यालय की संपत्तियों को अटैच कर दिया है। रायपुर स्थित लखमा के बंगले और सुकमा में उनके पारिवारिक मकान को भी जब्त किया गया है। इस कार्रवाई की विभागीय सूत्रों ने पुष्टि की है, वहीं ED की ओर से जल्द ही आधिकारिक बयान भी जारी किया जाएगा।

ED के अनुसार, कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के महत्वपूर्ण कड़ी थे, जो पूरे तंत्र को संचालित करते थे। एजेंसी का दावा है कि घोटाले के दौरान लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए की अवैध कमाई होती थी, जो बेटे हरीश लखमा के घर निर्माण और सुकमा कांग्रेस भवन में खर्च की गई। कुल मिलाकर लखमा को 3 साल में करीब 72 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।

इस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह ED जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के सुकमा जिला कार्यालय को अटैच करना सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला है। अगर ED इतनी ही निष्पक्ष है, तो भाजपा के 150 करोड़ से बने कुशाभाऊ ठाकरे कार्यालय का हिसाब भी क्यों नहीं लेती?”

गौरतलब है कि कवासी लखमा को पहले ही 16 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया जा चुका है और वे अभी जेल में बंद हैं। ED ने पहले ही लखमा, उनके बेटे और करीबी सहयोगियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें रायपुर, सुकमा और जगदलपुर शामिल हैं।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?

यह मामला करीब 2161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा, IAS अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर और आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है। आरोप है कि FL-10 लाइसेंस के जरिए एक सिंडिकेट ने अवैध शराब व्यापार को बढ़ावा दिया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया।

संपत्ति अटैचमेंट का मतलब?

ED द्वारा संपत्ति अटैच करना कानूनी प्रक्रिया के तहत एक अस्थायी जब्ती होती है। इससे संबंधित संपत्तियों को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता, जब तक कोर्ट की ओर से अंतिम निर्णय नहीं आ जाता। कवासी लखमा ने पहले खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उन्होंने सिर्फ 2 एकड़ जमीन खरीदी थी और किसी प्रकार की अवैध कमाई नहीं की। लेकिन ED का कहना है कि उनके पास मिले साक्ष्य लखमा और उनके परिवार की सीधे तौर पर सिंडिकेट से जुड़ाव की पुष्टि करते हैं।

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