रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने के दौरान सदन में गंभीर चर्चा के साथ-साथ तंज, चुटकुले और तीखी टिप्पणियों का दौर भी चला। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के सदन में पहुंचने से पहले ही सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी शुरू हो गई थी। संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि “हमारे युवा मंत्री रजत जयंती वर्ष में बजट पेश कर रहे हैं।” इस पर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने चुटकी लेते हुए कहा कि “अभी वित्त मंत्री आए नहीं हैं, उससे पहले उन्हें बुलाने के लिए गाना गाया जा रहा है।”
देरी पर भूपेश का तंज
वित्त मंत्री तय समय से करीब तीन मिनट देरी से सदन पहुंचे। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कटाक्ष करते हुए कहा, “जो समय का प्रबंधन नहीं कर पा रहा है, उसका वित्तीय प्रबंधन क्या होगा, आप समझ सकते हैं।” उन्होंने कहा कि सदन में समय का बहुत महत्व होता है और वित्त मंत्री दौड़ते-भागते सदन में पहुंचे। इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने पलटवार करते हुए कहा, “ऐसा प्रबंधन होगा कि आपके यहां से भागना मुश्किल हो जाएगा।” वहीं विधायक रामकुमार यादव का तंज भी गूंजा—“पहले ज्ञान, फिर गति, फिर दुर्गति।”
बजट भाषण के बीच स्वागत, एक नाम छूटा
बजट भाषण के दौरान सभापति धर्मजीत सिंह ने वित्त मंत्री को रोककर सदन में मौजूद सांसदों का स्वागत कराया। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी का नाम लेकर अभिनंदन किया गया। हालांकि, दुर्ग सांसद विजय बघेल सदन में मौजूद होने के बावजूद उनका नाम पुकारा नहीं गया। कुछ सदस्यों ने इशारों में ध्यान दिलाया, लेकिन औपचारिकता पूरी होते ही बजट भाषण आगे बढ़ गया।
आलू योजना और ‘चूहे’ पर ठहाके
जब वित्त मंत्री मैनपाट, शंकरगढ़, कुसमी और बगीचा क्षेत्र में आलू उत्पादन बढ़ाने की ‘आलू प्रदर्शन प्रोत्साहन योजना’ का जिक्र कर रहे थे, तब सदन में हल्की मुस्कान फैल गई। चन्द्रपुर विधायक रामकुमार यादव ने कहा, “चूहों को खोजने के लिए कुछ किया गया क्या?” इस पर वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने टिप्पणी की—“अब आलू से सोना बनाना है।” सदन में ठहाके गूंज उठे।
टोकाटाकी और सभापति का हस्तक्षेप
प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते समय पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने किस्त न मिलने की बात उठाई। वहीं रेत फ्री में देने के मुद्दे पर भी आरोप-प्रत्यारोप हुए। लगातार टोकाटाकी के बीच सभापति धर्मजीत सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के भाषण में व्यवधान उचित नहीं है, चर्चा बाद में होगी।
“बजट सुनते-सुनते थक गए” – लखमा
पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने भी चुटकी लेते हुए कहा, “वित्त मंत्री अपने बजट में कुछ नहीं छोड़ रहे हैं, सारी चीज पढ़ रहे हैं। हम बजट सुनते-सुनते थक गए हैं।” इस पर सदन में फिर हंसी का माहौल बन गया।
पोस्टर पहनकर पहुंचीं विधायक
सरायपाली से विधायक चातुरी डिग्रीलाल नंद निर्माणाधीन सोलर प्लांट के विरोध में पोस्टर पहनकर सदन पहुंचीं। उन्होंने कहा कि ग्राम जंगलबेड़ा के ग्रामीण पिछले 15 दिनों से विरोध कर रहे हैं और वे जल, जंगल, जमीन की लड़ाई में उनके साथ हैं। पूरे दिन सदन में तंज, ठहाके और तल्ख टिप्पणियों के बीच 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश हुआ। अब इस पर विस्तृत चर्चा और विपक्ष के सवालों के साथ आने वाले दिनों में सदन में और तीखी बहस होने की संभावना है।