
रायपुर। प्रदेश के दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने के लिए राज्य सरकार 18 से 25 मई तक “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान चलाने जा रही है। इस विशेष ट्राइबल आउटरीच अभियान के तहत अफसर गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे, योजनाओं का लाभ दिलाएंगे और कई मामलों का मौके पर ही निराकरण करेंगे। आदिम जाति विकास विभाग की ओर से संचालित इस अभियान में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) के 1544 गांव और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के 6691 गांवों को शामिल किया गया है। रायपुर जिले को छोड़कर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में यह अभियान संचालित होगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य, राशन, शिक्षा, पोषण, पेयजल और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा। गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे, जहां सिकल सेल और टीबी जैसी बीमारियों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
गांवों में लगेगी अफसरों की चौपाल
राज्य सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गांवों में पहुंचकर सीधे ग्रामीणों से संवाद करें और उनकी शिकायतों का समाधान करें। इसके लिए विशेष “आदि सेवा केन्द्र” बनाए गए हैं, जहां लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा। अभियान के तहत ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वरिष्ठ अधिकारी गांवों में चौपाल लगाकर जनसुनवाई करेंगे और पात्र लोगों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ दिलाएंगे।
राशन, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं पर फोकस
अभियान के दौरान पात्र परिवारों को राशन कार्ड, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को पेंशन योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ पोषण और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर रहेगा। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में मेडिकल कैंप लगाएंगी, जहां मुफ्त जांच और उपचार किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा प्रभावित करने वाली बीमारियों सिकल सेल एनीमिया और टीबी की विशेष जांच भी की जाएगी।
डिजिटल निगरानी से होगी मॉनिटरिंग
अभियान की मॉनिटरिंग डिजिटल माध्यम से की जाएगी। हर दिन की गतिविधियों की फोटो, वीडियो और हितग्राहियों के अनुभव “आदि प्रसारण” पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। सरकार ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, एनएसएस, एनसीसी और महिला स्व-सहायता समूहों को भी इस अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। अभियान को “सुशासन तिहार” और “जनजातीय गरिमा उत्सव” से भी जोड़ा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। mराज्य सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच आसान बनाना और केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।