
डिजिटल गवर्नेंस, एआई, कृषि समृद्धि और नेतृत्व विकास पर मंथन; ई-ऑफिस, हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचारों का दिया उदाहरण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में सुधार और नवाचार का प्रभावी माध्यम बन चुका है।
आईआईएम रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर 3.0 में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में मिले सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे में पारदर्शिता और गति आई। इसी तरह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार भी चिंतन शिविरों की देन हैं। वर्तमान में सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
शिविर के प्रथम दिन नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती तकनीकों और कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने मूल्य आधारित नेतृत्व, सेवा-भाव और संवेदनशील प्रशासन पर जोर दिया। वहीं नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन के जरिए शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।
‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को लगातार बढ़ावा देती रहेगी तथा शिविर से निकले सुझावों को जल्द ही ठोस प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों के रूप में लागू किया जाएगा।