रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है, जो 20 मार्च तक चलेगा। कुल 15 बैठकों वाले इस सत्र में एक हजार से अधिक प्रश्न लगाए गए हैं और 12 से ज्यादा विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इन्हीं में धर्मांतरण संशोधन विधेयक को भी सदन में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। सत्र की शुरुआत से पहले दोनों प्रमुख दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने 23 फरवरी को विधायक दल की बैठक बुलाई है, वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत उसी दिन राजीव भवन में कांग्रेस विधायक दल की बैठक लेंगे।
52 बैठकों के बाद तैयार हुआ मसौदा
गृहमंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में धर्मांतरण संशोधन विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है। समिति के सदस्यों के अनुसार राज्य में धर्मांतरण से जुड़े विवादों को रोकने और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से यह ड्राफ्ट तैयार किया गया है। मसौदा तैयार करने के लिए कुल 52 बैठकों में चर्चा की गई। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। धर्म परिवर्तन से 60 दिन पूर्व संबंधित प्राधिकरण को लिखित सूचना देना अनिवार्य किया जा सकता है। बिना विधिक प्रक्रिया के किया गया धर्म परिवर्तन वैध नहीं माना जाएगा। साथ ही, यदि किसी पर दबाव, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी सजा और जेल का प्रावधान किया जाएगा। राज्य सरकार धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा स्पष्ट कानून भी लाने की तैयारी में है।
क्यों महसूस हुई कानून की जरूरत?
राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों—विशेषकर बस्तर, जशपुर और रायगढ़—में धर्मांतरण को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में यह मामला सामाजिक तनाव का कारण भी बना है। सरकार का मानना है कि स्पष्ट कानूनी ढांचा न होने के कारण स्थिति जटिल हो जाती है। फिलहाल छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला कोई स्पष्ट नियम नहीं है। प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से सरकार इस प्रक्रिया को नियमबद्ध करने और संभावित विवादों को रोकने का प्रयास कर रही है। गृह विभाग ने अन्य नौ राज्यों के संबंधित कानूनों का अध्ययन कर ड्राफ्ट तैयार किया है।
क्या है धार्मिक स्वतंत्रता का प्रावधान?
संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का धर्म मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अधिकार माना जाता है। हालांकि सरकार का तर्क है कि इस स्वतंत्रता के नाम पर यदि किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या जबरन धर्म परिवर्तन होता है, तो उसे रोकने के लिए स्पष्ट कानून आवश्यक है। अब सभी की निगाहें बजट सत्र पर टिकी हैं, जहां धर्मांतरण संशोधन विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि सदन में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है और विधेयक किस रूप में पारित होता है।