रायपुर। राज्य में बढ़ते सड़क हादसों ने चिंता बढ़ा दी है। औसतन हर दिन करीब 40 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और 13 से 14 लोगों की मौत हो रही है। यानी लगभग हर 36 मिनट में एक हादसा दर्ज हो रहा है। इन चिंताजनक आंकड़ों के बीच सरकार ने अब दुर्घटना के बाद त्वरित इलाज और जान बचाने पर विशेष फोकस किया है। भारत सरकार की पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 7 दिन तक अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ‘गोल्डन ऑवर’—यानी हादसे के बाद का पहला एक घंटा—का प्रभावी उपयोग करना है, जब सही और समय पर इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है।
परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने इस संबंध में सभी जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डायल-112 टीम के साथ वर्चुअल बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत नजदीकी अधिकृत अस्पताल में भर्ती कराया जाए, ताकि इलाज में देरी न हो। प्रदेश में लगभग 1000 अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर अन्य सक्षम अस्पतालों को भी सूची में शामिल किया जाएगा। साथ ही अस्पतालों को भुगतान 10 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कैशलेस इलाज की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
अधिकारियों के अनुसार सरकार की रणनीति दो स्तर पर काम करेगी—पहला, सड़क सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू कर दुर्घटनाओं में कमी लाना; और दूसरा, हादसा होने की स्थिति में हर संभव प्रयास कर जान बचाना। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल बेहतर इलाज की व्यवस्था पर्याप्त है, या सड़क पर अनुशासन, निगरानी और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन भी उतना ही जरूरी है। क्योंकि यदि रफ्तार और लापरवाही पर लगाम नहीं लगी, तो हर 36 मिनट में एक और परिवार उजड़ता रहेगा।