जगदलपुर। देश को माओवादी हिंसा से मुक्त घोषित करने की दिशा में अब उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान के तहत 31 मार्च तक औपचारिक घोषणा की संभावना जताई जा रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गए संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हुई है।
दशकों पुरानी चुनौती
1980 के दशक के अंत में आंध्र प्रदेश के रास्ते दक्षिण बस्तर में प्रवेश करने वाले वामपंथी उग्रवादी संगठनों ने वर्ष 2004 से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के नाम से गतिविधियां संचालित कीं। 2005 में सलवा जुडूम आंदोलन शुरू हुआ, लेकिन हिंसा का सिलसिला जारी रहा। 2007 में बीजापुर में 50 सीआरपीएफ जवानों की शहादत और 2010 में दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में 76 जवानों के बलिदान ने देश को झकझोर दिया। 25 मई 2013 के झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के शीर्ष प्रादेशिक नेतृत्व की जान गई थी।
बड़े नेताओं के निष्क्रिय होने से संगठन कमजोर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2024 के बाद से अब तक 500 से अधिक माओवादी मारे गए हैं। बीते दस महीनों में संगठन को लगातार बड़े झटके लगे हैं। मई 2025 में महासचिव बसव राजू की मौत और अक्टूबर 2025 में केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख भूपति के समर्पण के बाद अब थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी के आत्मसमर्पण ने संगठन की रणनीतिक संरचना को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। देवजी के समर्पण को निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि छत्तीसगढ़-तेलंगाना-ओडिशा क्षेत्र में संगठन की नेतृत्व क्षमता लगभग ध्वस्त हो चुकी है। बस्तर संभाग में भी इसका असर दिखा है, जहां हाल में कांकेर में दो माओवादियों ने एके-47 के साथ आत्मसमर्पण किया।
31 दिन में निर्णायक चरण
केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के चलते अभियान को अंतिम चरण में बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यदि स्थिति इसी तरह बनी रही तो 31 मार्च को माओवादी हिंसा के समूल अंत की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी स्तर पर वैचारिक संघर्ष अभी जारी रहेगा।
पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को चुनाव लड़ने और जनता के लिए काम करने का अधिकार है, बशर्ते वे हिंसा और हथियार का रास्ता छोड़ दें। बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की संभावनाएं अब मजबूत होती दिख रही हैं। अगले 31 दिनों में होने वाली प्रगति पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।