YC न्यूज़ डेस्क । मंगलवार को नई दिल्ली स्थित नवनिर्मित पीएमओ बिल्डिंग ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य ‘केरल’ का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह प्रस्ताव पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार की ओर से भेजा गया था। मुख्यमंत्री विजयन ने स्पष्ट किया था कि राज्य की मातृभाषा मलयालम में इसे ‘केरलम’ कहा जाता है और लंबे समय से इसे औपचारिक मान्यता देने की मांग की जा रही थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौर से ही मलयालम भाषी समुदायों के लिए एकीकृत ‘केरलम’ की अवधारणा मौजूद रही है।
दूसरी बार में सफल हुआ प्रस्ताव
यह प्रस्ताव केरल विधानसभा से दूसरी बार पारित होकर केंद्र सरकार के पास पहुंचा था।
- अगस्त 2023 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था।
- इसके बाद गृह मंत्रालय ने तकनीकी संशोधनों का सुझाव दिया।
- जून 2024 में संशोधनों को शामिल करते हुए प्रस्ताव दोबारा पारित किया गया।
- अब ‘सेवा तीर्थ’ में हुई कैबिनेट बैठक में संशोधित प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे दी गई।
संविधान में संशोधन की प्रक्रिया
वर्तमान में भारतीय संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। नाम परिवर्तन के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मुख्यमंत्री विजयन ने आग्रह किया था कि केंद्र सरकार न केवल आधिकारिक दस्तावेजों में, बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ दर्ज करे।
सांस्कृतिक अस्मिता को नई पहचान
राज्य सरकार का मानना है कि इस निर्णय से केरल की भाषाई अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव को नई पहचान मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला क्षेत्रीय पहचान और स्थानीय भाषा को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कैबिनेट के इस निर्णय के बाद अब संवैधानिक संशोधन और औपचारिक अधिसूचना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।