रायपुर, 5 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में राज्य जीएसटी विभाग ने टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। विभागीय सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी और सेवा प्रदाता हैं, जो जीएसटी के दायरे में आने के बावजूद अब तक पंजीयन नहीं करा रहे हैं। अब ऐसे करीब डेढ़ लाख अपंजीकृत कारोबारियों को 10 अप्रैल के बाद नोटिस जारी किए जाएंगे। वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रावधानों के अनुसार, जिन व्यापारियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से अधिक और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपए से ज्यादा आय है, उनके लिए जीएसटी पंजीयन अनिवार्य है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में ऐसे पात्र कारोबारियों की संख्या लगभग 3.5 लाख होनी चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल करीब 2 लाख ही पंजीकृत हैं।
राज्य जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि इस अंतर को खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बैंकों और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी से उन क्षेत्रों की जानकारी ली जा रही है, जहां बिजली खपत असामान्य रूप से बढ़ी है। इन स्थानों पर संचालित फैक्ट्रियों और कारोबार की जांच कर वास्तविक टर्नओवर का आकलन किया जाएगा। जांच में यह भी सामने आया है कि नॉन-ब्रांडेड सामान का कारोबार करने वाले व्यापारी—जैसे जूते-चप्पल, कपड़े, फर्नीचर, बर्तन और प्लास्टिक उत्पाद—अक्सर जीएसटी पंजीयन से बच रहे हैं। जबकि इनका सालाना टर्नओवर कई मामलों में एक करोड़ रुपए तक पहुंच रहा है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजीयन के बाद दुकानों, दफ्तरों और फैक्ट्रियों के बाहर जीएसटी नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर 30 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में करीब 40 प्रतिशत व्यापारी इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, जिन पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोयला और ट्रांसपोर्टिंग सेक्टर को भी विशेष निगरानी में रखा गया है, जहां बिना बिल के कारोबार के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। विभाग की टीमें इन क्षेत्रों में लगातार जांच कर रही हैं।
जीएसटी विभाग का कहना है कि पहले चरण में अपंजीकृत व्यापारियों को जागरूक किया जाएगा, लेकिन जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लक्ष्य है कि इस वर्ष पंजीकृत कारोबारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाए।