धान की फसलों पर संकट: चक्रवात ‘मोन्था’ से बढ़ी नमी, धान में पतंगों और माहो का प्रकोप,कटाई-मिजाई पर विलम्ब, किसानों की बढ़ी चिंता

धान की फसलों पर संकट: चक्रवात ‘मोन्था’ से बढ़ी नमी, धान में पतंगों और माहो का प्रकोप,कटाई-मिजाई पर विलम्ब, किसानों की बढ़ी चिंता

दुर्ग। प्रदेश में चक्रवात मोन्था का असर सुबह से दिखाई देने लगा। राजधानी रायपुर सहित दुर्ग भिलाई में हल्की वर्षा हुई, वहीं उत्तरी छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। अनेक जिले में रुक-रुककर हो रही बारिश से धान फसल की कटाई प्रभावित हो रही है। कई जगह खेतों में गिरी पकी फसल के खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के कारण जिले में पिछले दो दिनों से बादल छाए हुए हैं और रुक-रुककर बारिश हो रही है। मौसम में आई अतिरिक्त नमी के चलते इस समय राजधानी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कीट-पतंगों, विशेषकर हरे-सफेद माहो का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा असर धान की खड़ी फसलों पर पड़ रहा है।

कृषि विभाग के अनुसार, लगातार हो रही वर्षा से कई जिलों में धान की कटाई-मिजाई प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भर जाने से हार्वेस्टर मशीनें नहीं चल पा रही हैं। किसान अब मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, भूरा माहो का प्रकोप बढ़ने से धान की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यह वर्षा फसलों के लिए हानिकारक सिद्ध हो रही है और इससे उत्पादन व बाजार मूल्य दोनों पर असर पड़ेगा।

मौसम वैज्ञानिक डॉ. चन्द्रा ने बताया कि चक्रवात मोन्था अब समुद्र तट से टकराकर कमजोर हो गया है, किंतु इसका प्रभाव ओडिशा, आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है। 27 अक्टूबर को दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में वर्षा हो रही है, जबकि 28 अक्टूबर को एक-दो स्थानों पर अति भारी वर्षा भी हो सकती है। 28 से 29 अक्टूबर के बीच प्रदेश में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएँ चलने की चेतावनी जारी की गई है।

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