पाटन । ग्राम लोहरसी में इन दिनों नवदिवसीय संगीतमय श्री शिव महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा का भव्य आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ किया जा रहा है। इस पुण्य आयोजन में श्री धाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रांशू कृष्ण शास्त्री महाराज जी शिव महापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान करा रहे हैं। कथा के पांचवें दिन माता पार्वती के जन्म, भगवान शिव एवं माता पार्वती के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में कभी भी भगवान की परीक्षा या समीक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने माता सती द्वारा भगवान राम की परीक्षा लेने और उसके परिणामस्वरूप शिव द्वारा सती का त्याग किए जाने का प्रसंग सुनाया। साथ ही रामचरितमानस के सूर्पनखा प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया कि ईश्वर की समीक्षा करने का दुष्परिणाम भुगतना पड़ता है।
महाराज जी ने कहा कि यदि जीवन में कुछ सीखना है तो माता शबरी से सीखें, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और प्रतीक्षा नहीं छोड़ी और अंततः भगवान राम के दर्शन प्राप्त किए। उन्होंने बताया कि भक्ति के मार्ग से भगवान शिव की प्राप्ति होती है और शिव की कृपा से ही जीवन का कल्याण संभव है। माता पार्वती के बिना शिव भी अधूरे हैं। भगवान शिव ने काम पर विजय प्राप्त कर संपूर्ण सृष्टि को संयम, त्याग और आत्मसंयम का मार्ग दिखाया। इंद्रियों पर विजय पाने से ही काम और क्रोध जैसे विकारों पर नियंत्रण संभव है। प्रवचन में नारी सम्मान पर विशेष जोर देते हुए महाराज जी ने कहा कि नारी की निंदा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि नारी सृष्टि की जननी है। ध्रुव, भक्त प्रह्लाद जैसे महान भक्त भी नारी की कोख से जन्मे हैं। माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया, जिससे विवाह उत्सव का दिव्य एवं आनंदमय वातावरण बना रहा।
इस शिव महापुराण कथा के मुख्य आयोजनकर्ता गणेश राम चंद्राकर, अहिल्या बाई चंद्राकर, नीता चंद्राकर, चंद्रशेखर चंद्राकर, पूर्णिमा चंद्राकर, गोलू चंद्राकर, लोकेश्वरी चंद्राकर, मनीष चंद्राकर सहित आयोजन समिति के सदस्य हैं। कथा में सांसद दुर्ग विजय बघेल, पूर्व जनपद अध्यक्ष हर्षा चंद्राकर, पूर्व मंडल अध्यक्ष लोकमनी चंद्राकर, सरपंच कातरो जितेंद्र सोनी, रज्जु सोनी, कमल चंद्राकर, शीतल चंद्राकर, संजय चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।