बिलासपुर। पद्मश्री पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पं. चतुर्वेदी के सपनों को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शुक्रवार को बिलासपुर के लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने की। कार्यक्रम में पं. चतुर्वेदी पर केंद्रित एक स्मृति ग्रंथ का विमोचन किया गया, जिसका संपादन वरिष्ठ पत्रकार रुद्र अवस्थी ने किया है। साथ ही उनकी चर्चित छत्तीसगढ़ी कृति ‘भोलवा भोलाराम बनिस’ और डॉ. सुषमा शर्मा द्वारा किए गए उसके हिंदी अनुवाद का भी लोकार्पण हुआ।
‘पद्मश्री’ सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव
डिप्टी सीएम साव ने कहा कि 2 अप्रैल 2018 को पं. चतुर्वेदी को ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया जाना छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अस्मिता का सम्मान था। उन्होंने पं. चतुर्वेदी को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बताते हुए कहा कि वे कवि, साहित्यकार, पत्रकार और बेबाक वक्ता थे। उन्होंने कहा कि पं. चतुर्वेदी 100 प्रतिशत छत्तीसगढ़ी संस्कारों से ओत-प्रोत थे और उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की माटी, भाषा और लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष भी रहे।
‘छत्तीसगढ़ का चेहरा थे पं. चतुर्वेदी’
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ की भाषा और संस्कृति की बात हो और पं. चतुर्वेदी का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं। वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने उन्हें छत्तीसगढ़ की प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के नामचीन संपादक जैसे प्रभाष जोशी, राजेंद्र माथुर और जार्ज वर्गीस भी उनके व्यक्तित्व और लेखन के कायल थे।
‘गुरतुर गोठ’ की पहचान
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने कहा कि पं. चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ी को ‘गुरतुर गोठ’ के रूप में स्थापित किया। उनकी भाषा लोककला और लोकजीवन की आत्मा से निर्मित थी। उन्होंने बताया कि पं. चतुर्वेदी पर उनके निर्देशन में चार शोधार्थियों ने पीएचडी पूरी की है। उनकी कविता ‘बेटी के बिदा’ विशेष रूप से चर्चित रही।
पत्रकारों का सम्मान
कार्यक्रम में पं. चतुर्वेदी पर 60 मिनट की डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने वाले पत्रकार रुद्र अवस्थी, वैभव बेमेतरिहा और वरिष्ठ पत्रकार पीयूष मुखर्जी का सम्मान भी किया गया। समारोह में महापौर पूजा विधानी, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, अटल श्रीवास्तव, सुशांत शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि, साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। डिप्टी सीएम साव ने दोहराया कि छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने की दिशा में राज्य सरकार गंभीरता से कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल भाषा, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव को नई पहचान देगा।