रायपुर। बस्तर के विकास को नई रफ्तार देने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) अब क्षेत्र के लिए गेमचेंजर साबित होने जा रही है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बस्तर को सीधे समुद्री बंदरगाह से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रास्ता खोल देगा।
अभी तक जगदलपुर से विशाखापट्टनम तक पहुंचने में 7 से 9 घंटे का समय लगता है, जिसमें ओडिशा के कठिन घाटों से गुजरना पड़ता है। लेकिन इस नए कॉरिडोर के बन जाने के बाद यह दूरी मात्र 3.5 से 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। इससे परिवहन लागत घटेगी और समय की बड़ी बचत होगी।
इस परियोजना की एक अहम कड़ी ओडिशा के नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज होगा, जहां से बस्तर सीधे कॉरिडोर से जुड़ जाएगा। इससे बस्तर के उत्पाद—अरेबिका कॉफी, इमली, महुआ और ढोकरा शिल्प—आसानी से बंदरगाह तक पहुंच सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना सकेंगे।
यह कॉरिडोर कांकेर, कोंडागांव और बस्तर के अन्य जिलों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति देगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, वहीं औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी तेजी आएगी।
परियोजना के तहत कांकेर जिले के केशकाल क्षेत्र में 2.79 किमी लंबी छत्तीसगढ़ की पहली ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है, जो इंजीनियरिंग और पर्यावरण संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास और ओवरपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
करीब 16,491 करोड़ रुपये की लागत और 464 किमी लंबाई वाला यह कॉरिडोर बस्तर को ‘लैंड-लॉक्ड’ स्थिति से बाहर निकालते हुए उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ के लिए विकास का नया द्वार खोलेगी और बस्तर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।