रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम इस बार केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि टॉपर्स की प्रेरणादायक कहानियों ने सभी का ध्यान खींचा है। 12वीं में 83.04% और 10वीं में 77.15% छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं। मेरिट सूची में जहां 12वीं के टॉप-10 में 43 और 10वीं में 42 विद्यार्थियों ने जगह बनाई, वहीं इस बार लड़कियों का दबदबा भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। इन उपलब्धियों के पीछे सिर्फ अंक नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानियां छिपी हैं। किसी छात्र ने असफलता को अपनी ताकत बनाया, तो किसी ने बिना कोचिंग डिजिटल प्लेटफॉर्म के सहारे सफलता हासिल की।
बलौदाबाजार जिले के पलारी निवासी जिज्ञासु वर्मा ने 12वीं में 98.60% अंक लाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। खास बात यह रही कि 10वीं में मात्र दो अंकों से मेरिट सूची से बाहर रहने की कसक को उन्होंने अपनी प्रेरणा बनाया। साधारण परिवार से आने वाले जिज्ञासु ने परीक्षा से 21 दिन पहले मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पूरी तरह पढ़ाई पर फोकस किया।
वहीं, रायपुर की हिमशिखा गुप्ता ने बिना किसी कोचिंग के 96.80% अंक हासिल कर प्रदेश में 8वां स्थान प्राप्त किया। उन्होंने पढ़ाई के लिए यूट्यूब और ChatGPT जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद हिमशिखा ने यह साबित किया कि तकनीक का सही उपयोग सफलता की राह आसान बना सकता है।
राजधानी की ही आफिया खातून ने 9वां स्थान हासिल कर यह दिखाया कि आर्थिक सीमाएं सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं। मोटर मैकेनिक की बेटी आफिया ने बिना कोचिंग, ऑनलाइन स्टडी मटेरियल और आत्मनिर्भरता के दम पर यह मुकाम हासिल किया। अब उनका लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास करना है।
कांकेर की दिव्यांग छात्रा यश खोबरागड़े ने 96.40% अंक प्राप्त कर प्रदेश में 10वां स्थान हासिल किया। उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौतियों को कभी बाधा नहीं बनने दिया और निरंतर मेहनत से सफलता हासिल की। इसी तरह, बलौदाबाजार के कटगी गांव के नितेश देवांगन ने करघे के घर से निकलकर प्रदेश की मेरिट सूची में 9वां स्थान प्राप्त किया। सीमित संसाधनों और पारंपरिक व्यवसाय के बीच पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह साबित किया कि मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
इन सभी छात्रों की कहानियां यह बताती हैं कि सफलता के लिए महंगे संसाधनों से ज्यादा जरूरी है सही दिशा, अनुशासन और आत्मविश्वास। कहीं मोबाइल से दूरी ने सफलता दिलाई, तो कहीं उसी मोबाइल और डिजिटल दुनिया ने पढ़ाई को आसान बनाया। छत्तीसगढ़ के ये टॉपर्स आज सिर्फ मेरिट लिस्ट के नाम नहीं हैं, बल्कि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।