रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लगातार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के घोटालों की परतें खोल रहा है। कोयला और शराब घोटालों के बाद अब ईडी की जांच की आंच डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) मद तक पहुंच चुकी है। बीज निगम और कृषि विभाग में कृषि यंत्रों व उपकरणों के नाम पर हुए करीब 350 करोड़ रुपये के घोटाले में ईडी ने ठेकेदारों और कारोबारियों के 28 ठिकानों पर छापेमारी की है।
कार्रवाई में 4 करोड़ रुपये नकद, 10 किलो चांदी के जेवर, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। ईडी का कहना है कि अब तक की जांच में यह साफ हुआ है कि बीज निगम के अधिकारियों ने विक्रेताओं और ठेकेदारों के साथ मिलकर डीएमएफ फंड का दुरुपयोग किया। इसके एवज में अफसरों ने अनुबंध मूल्य का 45 से 60% तक कमीशन रिश्वत के रूप में वसूला।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार के दौरान शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग में भी डीएमएफ मद से भारी-भरकम सप्लाई ऑर्डर जारी किए गए। इन सप्लाई ऑर्डर्स में एटी और केके नामक प्रभावशाली सप्लायरों का दबदबा था। घटिया और अधूरी सामग्री स्कूलों व छात्रावासों में सप्लाई की गई, लेकिन रिकॉर्ड में उसे पूर्ण दिखाकर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
वाटर कूलर से लेकर अन्य उपकरणों तक की आपूर्ति में यह गड़बड़ी की गई। अधिकारियों और सप्लायरों की मिलीभगत से डीएमएफ मद भ्रष्टाचार का बड़ा जाल खड़ा हुआ। ईडी का मानना है कि यदि खनन प्रभावित जिलों में शिक्षा और आदिवासी विभाग की सप्लाई की गहराई से जांच की गई तो कई अधिकारियों और इस भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले आईएएस अफसरों के नाम भी सामने आएंगे।
ईडी की कार्रवाई ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति को गरमा दिया है। सत्ता परिवर्तन को डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जांच एजेंसियां अब भी पूर्ववर्ती शासनकाल के घोटालों की गुत्थी सुलझाने में जुटी हैं।