“DPI का सख्त फरमान: 3 दिन में रिपोर्ट दो, सस्पेंशन-बहाली के ‘बैकडोर खेल’ पर गिरेगी गाज”

रायपुर, 23 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में दागी कर्मचारियों और संदिग्ध प्रक्रियाओं पर अब सख्ती तेज हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के ताजा आदेश ने जेडी (संयुक्त संचालक) और डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। डीपीआई ने सभी अधिकारियों से पिछले छह महीनों में हुए निलंबन, बहाली और विभागीय जांच से जुड़े मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तीन दिन के भीतर मांगी है।माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद निलंबन के बाद जल्दबाजी में की गई बहाली और कथित ‘बैकडोर’ प्रक्रियाओं की परतें खुल सकती हैं। हाल के समय में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां शिक्षकों को निलंबन के कुछ ही दिनों में बहाल कर दिया गया, जबकि कुछ आदेश मीडिया में आने के बाद वापस भी लेने पड़े।

डीपीआई ने विभागीय जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए नई गाइडलाइन भी जारी की है। इसके तहत गंभीर मामलों (मेजर पेनल्टी) की जांच अधिकतम 6 महीने और सामान्य मामलों (माइनर पेनल्टी) की जांच 3 महीने में पूरी करना अनिवार्य किया गया है। अब जांच अधिकारी भी जवाबदेह होंगे और देरी होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘इंटिमेशन सिस्टम’ लागू किया जाएगा, जिससे जांच लंबित रहने तक संबंधित कर्मचारी को पदोन्नति या अन्य लाभ नहीं मिल सकेंगे। साथ ही मुख्यालय स्तर पर एक विशेष सेल गठित किया गया है, जो हर 15 दिन में लंबित मामलों की समीक्षा करेगा।इस सख्त रुख से साफ है कि शिक्षा विभाग अब लापरवाही और अनियमितताओं पर लगाम कसने के मूड में है, और आने वाले दिनों में बड़े खुलासे संभव है।

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