रायपुर। राज्य सरकार रेत खदानों में लंबे समय से जारी अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ड्रोन सर्वे को बड़ा हथियार बनाने जा रही है। पिछले वर्ष की गई घोषणा के बाद इस माह ड्रोन सर्वे के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जानकारों का मानना है कि इससे रेत चोरी पर रोक लगेगी, सरकारी रॉयल्टी में वृद्धि होगी और माफिया के खिलाफ ठोस डिजिटल सबूत जुटाए जा सकेंगे। सरकार ने टेंडर की शर्तों में साफ किया है कि सर्वे दिन और रात दोनों समय करना अनिवार्य होगा, ताकि अंधेरे में होने वाले अवैध उत्खनन पर भी कड़ी निगरानी रखी जा सके। ड्रोन से खदानों का सटीक नक्शा, उत्खनन की वास्तविक मात्रा और परिवहन गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। प्रदेश में 200 से अधिक रेत खदानें नीलाम हो चुकी हैं। अधिकांश खदानें संचालित हैं, जबकि कुछ को पर्यावरण स्वीकृति दिए जाने की प्रक्रिया जारी है। टेंडर शर्तों के अनुसार वही कंपनियां पात्र होंगी जिनके पास कम से कम तीन सरकारी कार्यों का अनुभव और दो करोड़ रुपए का वार्षिक टर्नओवर हो। चयनित एजेंसी को छत्तीसगढ़ के किसी भी हिस्से में काम करने के लिए तैयार रहना होगा।
बेसलाइन सर्वे से बनेगा रेफरेंस रिकॉर्ड
सूत्रों के मुताबिक, चयनित कंपनियां सबसे पहले प्रत्येक रेत खदान का बेसलाइन ड्रोन सर्वे करेंगी। इसमें खदान की सीमाएं, स्वीकृत क्षेत्र, नदी का बहाव, स्टॉक यार्ड, पहुंच मार्ग और संवेदनशील बिंदुओं का हाई-रिजॉल्यूशन ऑर्थो-मैप तैयार कर जीआईएस प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। यही आगे की निगरानी का रेफरेंस रिकॉर्ड बनेगा। ड्रोन सर्वे तय अंतराल पर औचक भी होगा और दिन-रात उड़ानें अनिवार्य रहेंगी। रात में थर्मल और लो-लाइट कैमरों से अवैध उत्खनन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और मशीनरी की गतिविधियों की पहचान की जाएगी। 3-डी मॉडल के आधार पर कट-एंड-फिल एनालिसिस कर वास्तविक निकासी का आकलन होगा, जिससे रॉयल्टी की गणना अधिक सटीक बनेगी।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ऑटो-अलर्ट सिस्टम
खदान क्षेत्र की गतिविधियों को कंट्रोल रूम से लाइव या रियल-टाइम में मॉनिटर किया जाएगा। यदि स्वीकृत सीमा से बाहर उत्खनन, संदिग्ध गतिविधि या तय रूट से हटकर परिवहन नजर आता है, तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जनरेट करेगा। जियो-टैग्ड फोटो, टाइम-स्टैम्प और डिजिटल मैप साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे जाएंगे। ड्रोन डेटा का ई-नीलामी, परिवहन पास और रॉयल्टी रिकॉर्ड से मिलान कर विसंगतियों की पहचान की जाएगी, जिससे कार्रवाई मजबूत और कानूनी रूप से टिकाऊ बन सके।
अवैध उत्खनन के बढ़ते आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, रेत सहित अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के मामले 2015-16 में 3,756 से बढ़कर 2020-21 में 5,410 तक पहुंच गए थे। 2015-16 से जून 2020 के बीच अवैध निकासी के 1,651 और अवैध परिवहन के 13,049 मामलों में 23.27 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2024 के बीच 7,723 मामले दर्ज हुए, जिनमें 23.76 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की गई। अप्रैल 2024 से जून 2025 के बीच 6,331 मामले सामने आए, 184 मशीनें जब्त की गईं और 56 एफआईआर दर्ज की गईं।
आम लोगों और नदियों को राहत
ड्रोन निगरानी लागू होने से तय मात्रा में ही रेत निकासी सुनिश्चित होगी, जिससे बाजार में कीमतों की स्थिरता बनी रह सकती है। इससे मकान निर्माण करने वाले लोगों को राहत मिलेगी। सबसे बड़ा लाभ नदी किनारों के कटाव में कमी और आसपास के गांवों की जमीन को नुकसान से बचाने के रूप में सामने आ सकता है। सरकार का मानना है कि इस पहल से एक ओर राजस्व बढ़ेगा, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों ने रुचि दिखाई है और आने वाले दिनों में पूरी निगरानी व्यवस्था लागू होने की संभावना है।