रायपुर। विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई, जब मुख्यधारा में लौटे 120 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा पहुंचकर सदन की कार्यवाही का अवलोकन किया। इनमें 66 पुरुष और 54 महिलाएं शामिल थीं। दर्शक दीर्घा से कार्यवाही देखते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नजदीक से समझा और संविधानिक व्यवस्था के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। इन आत्मसमर्पित नक्सलियों में 1 करोड़ रुपए का इनामी पूर्व नक्सली रूपेश और झीरम हमले में शामिल रहा सरेंडर नक्सली चैतू भी मौजूद थे। विधानसभा भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, गृहमंत्री विजय शर्मा और डीजीपी अरुण देव गौतम सहित अन्य मंत्रियों ने उनका स्वागत किया और उनसे मुलाकात की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लोकतंत्र पर भरोसा जताते हुए हिंसा का रास्ता छोड़ना प्रदेश के लिए सुखद संकेत है। उन्होंने कहा कि सरकार पुनर्वासित लोगों के बेहतर भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जो लोग संविधान में विश्वास जताते हैं, उनके लिए सरकार के द्वार हमेशा खुले हैं। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के परिणामस्वरूप अब तक 2500 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को लेकर अभियान तेज कर दिया गया है। पुनर्वास, कौशल विकास और आजीविका योजनाओं के माध्यम से स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संविधान और लोकतंत्र में आस्था जताने वालों का स्वागत किया जाएगा। हाल ही में सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व में शामिल ‘देवज’ नाम से विख्यात वरिष्ठ महासचिव के आत्मसमर्पण को भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।