
दुर्ग, 16 जून 2026। दुर्ग जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। यहां पदस्थ एक महिला डॉक्टर पर मरीज की बीमारी का गलत आकलन करने और बिना पर्याप्त चिकित्सकीय आधार के गंभीर बीमारी बताकर रेफर करने का आरोप लगा है। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत करते हुए संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, बुखार से पीड़ित एक युवती को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि जांच के दौरान महिला डॉक्टर ने युवती की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताते हुए उसके किडनी और लिवर फेल होने की आशंका जताई तथा तत्काल रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल रेफर करने की सलाह दी।
गंभीर बीमारी की बात सुन सदमे में आया परिवार
परिजनों का कहना है कि युवती में ऐसे कोई गंभीर लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे, जिनसे किडनी और लिवर फेल होने जैसी स्थिति का अंदेशा हो। डॉक्टर की बात सुनते ही परिवार घबरा गया और मानसिक तनाव में आ गया। इसी बीच परिजनों ने अन्य चिकित्सकों से भी सलाह लेने का निर्णय लिया।
निजी अस्पताल में इलाज के बाद मिली राहत
सरकारी अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद युवती को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच और उपचार किया। परिजनों के अनुसार, मात्र दो दिनों के इलाज के बाद युवती पूरी तरह स्वस्थ हो गई और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद परिवार को जिला अस्पताल में किए गए प्रारंभिक आकलन पर संदेह हुआ।
सिविल सर्जन को सौंपा शिकायत पत्र
घटना से नाराज परिजनों ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि गलत डायग्नोसिस के कारण परिवार को अनावश्यक मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
महिला डॉक्टर को नोटिस जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज ने संबंधित महिला डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उपचार व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सरकारी अस्पतालों की उपचार व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टरों द्वारा गंभीर बीमारियों की जानकारी देते समय पर्याप्त जांच और सावधानी बरतना आवश्यक है, क्योंकि एक गलत आकलन मरीज और उसके परिवार पर गहरा मानसिक प्रभाव डाल सकता है।