भिलाई। साहित्य, कला और संस्कृति के संवाहक मंच चिन्हारी साहित्य समिति के रजत जयंती वर्ष समारोह ने सिविक सेंटर स्थित आई.सी.आई भवन को भव्य सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर कर दिया। इस गरिमामयी अवसर पर दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल को ब्राजील में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने हेतु “चिन्हारी रजत जयंती वर्ष सम्मान 2025” से सम्मानित किया गया। समारोह की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक छत्तीसगढ़ी प्रतीकों – माता कौशल्या की फोटो फ्रेम, शाल-श्रीफल और धान की बाली भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वयं सांसद विजय बघेल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य डॉ. अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथियों में दुर्ग महापौर अलका वाघमर, प्रो. राजकुमार सचदेव (स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय, बिलासपुर), डॉ. राजेश श्रीवास, डॉ. विद्यावती चंद्राकर, और इतिहासविद् डॉ. शांतिकुमार कैवर्त्य शामिल रहे।
छत्तीसगढ़ में माता कौशल्या मंदिर निर्माण की उठी पुरजोर मांग
वक्ताओं ने माता कौशल्या की जन्मस्थली कोसला को देशभर में धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता जताई। डॉ. विद्यावती चंद्राकर ने कहा, “राम की ननिहाल आज भी विकास की बाट जोह रही है। यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता का विषय है।डॉ. राजेश श्रीवास ने भावुक अपील करते हुए कहा, “राम की भूमि में माता वृद्धाश्रम की स्थिति में न रहें, इसका संकल्प लेना होगा। महापौर अलका वाघमर ने भी मंदिर निर्माण को “छत्तीसगढ़ की अस्मिता का प्रश्न” बताया।
सांसद विजय बघेल ने मंच से कहा – छत्तीसगढ़ राज्य और चिन्हारी संस्था का जन्म लगभग एक साथ हुआ। जैसे राम ने सीता को अंगूठी चिन्ह रूप में दी थी, वैसे ही छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या का गौरव प्राप्त है। हमें मिलकर माता कौशल्या के भव्य मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। हरेली त्योहार से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से भेंट कर उन्हें आमंत्रित करने का प्रयास करूंगा।
कार्यक्रम में आयोजक कुलेश्वर प्रसाद निषाद, प्रदेश अध्यक्ष – निषाद समाज जन जागरण समिति एवं दुर्गा प्रसाद पारकर, प्रदेश अध्यक्ष – चिन्हारी साहित्य समिति सहित अन्य उपस्थित रहे ।