YC न्यूज़ डेस्क । 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को दिल्ली के कर्तव्यपथ पर निकली परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय विरासत, आदिवासी नायकों के शौर्य और भारत के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय की झलक ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की अवधारणा को प्रमुखता से दर्शाया गया। इसमें स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले आदिवासी नायकों के जीवन, संघर्ष और बलिदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। झांकी के अग्रभाग में धुरवा समुदाय के वीर नायक शहीद गुंडाधुर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। वीर गुंडाधुर 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नेतृत्वकर्ता थे, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित किया। ‘भूमकाल’ का अर्थ अन्याय के खिलाफ सामूहिक विद्रोह है। झांकी में आम के पत्तों की टहनी और सूखी लाल मिर्च को प्रतीक रूप में दिखाया गया, जो उस दौर के जनआंदोलन और प्रतिरोध के संकेत माने जाते हैं।
झांकी के मध्य भाग में डिजिटल संग्रहालय को एलईडी विजुअल्स के माध्यम से दर्शाया गया, जहां आदिवासी नायकों की जीवन गाथा और संघर्ष को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। यह छत्तीसगढ़ सरकार की उस पहल का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य जनजातीय इतिहास को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
झांकी के अंतिम हिस्से में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दिखाया गया। बिंझवार जनजाति के वीर नेता और सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह ने 1856 के अकाल के दौरान गरीबों को अनाज बांटकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। इस साहस के लिए उन्हें फांसी दी गई, लेकिन वे छत्तीसगढ़ के जननायक के रूप में अमर हो गए।
छत्तीसगढ़ की झांकी को कर्तव्यपथ पर दर्शकों से भरपूर सराहना मिली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी झांकी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरवशाली क्षण है। उन्होंने कहा कि झांकी के माध्यम से जनजातीय पराक्रम, शौर्य, बलिदान और स्वाभिमान की गाथा को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।
सीएम साय ने अपने संदेश में कहा कि यह झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश के सभी जनजातीय वीर शहीदों को नमन करते हुए जय हिंद, जय छत्तीसगढ़ का उद्घोष किया।