
अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा समेत कई नाम जांच के घेरे में, गोवा का होटल वेस्टिन भी ईडी की कार्रवाई में शामिल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित शराब सिंडिकेट से जुड़ी 1000 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य की संपत्तियों को अटैच कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई इस कार्रवाई में कई कंपनियां, होटल परिसंपत्तियां और अन्य बेनामी संपत्तियां शामिल हैं। ईडी के अनुसार, मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल अनवर ढेबर पर कथित अवैध कमाई को विभिन्न बेनामी संपत्तियों में निवेश करने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब सिंडिकेट के संचालन और वित्तीय लेनदेन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जांच के दायरे में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा भी हैं। ईडी का आरोप है कि आबकारी व्यवस्था में कथित हेरफेर कर सिंडिकेट को लाभ पहुंचाने में उनकी भूमिका रही। एजेंसी ने कहा कि कार्रवाई जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
ईडी ने विकास अग्रवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने डिस्टिलरी संचालकों और FL-10A लाइसेंसधारकों से कथित कमीशन वसूलकर राशि सिंडिकेट तक पहुंचाने का काम किया। मामले में चैतन्य बघेल का नाम भी सामने आया है। ईडी के मुताबिक शराब घोटाले से जुड़ी कथित रकम का उपयोग गोवा स्थित होटल वेस्टिन की खरीद में किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में नकद राशि पहुंचाने की भूमिका भी निभाई गई।
ईडी ने राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल के नाम पर दर्ज होटल वेस्टिन गोवा को भी अटैच किया है। इसके अलावा ओम साईं बेवरेज, दीशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पॉवर इंजीटेक जैसी कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन संस्थाओं के मुनाफे का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर शराब सिंडिकेट तक पहुंचाया जाता था। जांच के दौरान विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर को भी नया आरोपी बनाया गया है। ईडी का आरोप है कि प्रबीर शर्मा सिंडिकेट की वित्तीय गतिविधियों में सहयोग करते हुए करोड़ों रुपये नकद पहुंचाने का काम करते थे।
ताजा कार्रवाई के बाद इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपियों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। ईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में से एक है, जिसकी जांच ईडी सहित विभिन्न एजेंसियां लंबे समय से कर रही हैं। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से पहले भी असहमति और कानूनी चुनौती दी जाती रही है।