
पेट्रोल पंप तक लाइन खींचने के नाम पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप, हरे पेड़ों की कटाई पर भी उठे सवाल
जामगांव आर। छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गाड़ाडीह सब स्टेशन से तिवारी पेट्रोल पंप तक नई बिजली लाइन बिछाने के दौरान विभाग पर मनमाने तरीके से विद्युत पोल लगाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने के आरोप लगे हैं। इसे लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा मुख्य जिला मार्ग की सीमा के भीतर ही बिजली के खंभे खड़े किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जहां पोल लगाए जा रहे हैं, वहां सड़क किनारे सुरक्षित दूरी का पालन नहीं किया गया है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जिस मार्ग पर नई लाइन खींची जा रही है, वहां पहले से थ्री-फेज बिजली लाइन मौजूद है। यदि विभाग तकनीकी समझदारी दिखाता तो मौजूदा लाइन पर ऊंचे पोल लगाकर नई सप्लाई को जोड़ा जा सकता था। इससे सरकारी धन की बचत होती और अतिरिक्त भूमि व पेड़ों को नुकसान भी नहीं पहुंचता।
हरे पेड़ों पर भी चली आरी
नई लाइन के लिए रास्ते में आने वाले हरे-भरे वृक्षों की बेतरतीब कटाई को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि वैकल्पिक तकनीकी समाधान मौजूद हैं।
शिकायत के बाद भी नहीं रुका काम
ग्रामीणों के अनुसार मामले की जानकारी विभाग के कनिष्ठ यंत्री को दी गई थी। आरोप है कि पहले उन्होंने इसे पंचायत का विषय बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया, लेकिन अगले ही दिन निर्माण कार्य की गति और बढ़ा दी गई।
‘न नियमों की चिंता, न जनसुरक्षा की’
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है कि न तो किसी अनुमति की आवश्यकता समझी जा रही है और न ही जनसुरक्षा या पर्यावरण संरक्षण की चिंता की जा रही है। लोगों का आरोप है कि ठेका आधारित कार्यों में केवल काम पूरा करने की जल्दबाजी दिखाई जा रही है, जबकि सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश चौहान, संजय चंद्राकर,अशोक सिंह और सियाराम चंद्राकर ने बिजली विभाग से सड़क किनारे लगाए जा रहे पोलों को हटाकर सुरक्षित स्थान पर लगाने तथा पेड़ों की अनावश्यक कटाई तत्काल रोकने की मांग की है। वहीं गाड़ाडीह सरपंच ज्योति ध्रुव ने भी विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए जनहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग करते हुए उच्च अधिकारियो एवं जनप्रतिनिधियों से इसकी शिकायत करने की बात कही है।
सबसे बड़ा सवाल
जब सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी विकल्प मौजूद हैं, तब आखिर विभाग किस आधार पर सड़क की सीमा में खंभे खड़े कर रहा है? और यदि भविष्य में कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? यही सवाल अब ग्रामीण प्रशासन और बिजली विभाग से पूछ रहे हैं।