लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन, पात्रता का दायरा बढ़ा; 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक मिलेगी सहायता
रायपुर, 2 जून 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान केवल जेल में बंद रहे लोगों को ही नहीं, बल्कि पुलिस थानों में निरुद्ध रहे मीसाबंदियों को भी लोकतंत्र सेनानी का दर्जा और सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। सरकार के इस निर्णय से ऐसे कई लोग लाभान्वित होंगे, जो वर्षों से सरकारी मान्यता और सम्मान से वंचित थे। राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन कर पात्रता की शर्तों का दायरा बढ़ा दिया है। नए प्रावधानों के तहत आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले उन लोगों को भी सम्मान मिलेगा, जिनके पास जेल में बंद रहने का रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन वे पुलिस हिरासत या थानों में निरुद्ध रहे थे।
90 दिनों में करना होगा आवेदन
सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था के अनुसार पात्र व्यक्तियों को अधिसूचना जारी होने के 90 दिनों के भीतर आवेदन प्रस्तुत करना होगा। आवेदन संबंधित जिला प्रशासन के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका परीक्षण किया जाएगा।
दस्तावेजों के आधार पर होगा सत्यापन
सम्मान निधि का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदकों को जेल अधीक्षक अथवा संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद जिला स्तरीय समिति द्वारा जांच कर पात्रता का निर्धारण किया जाएगा।
हिरासत अवधि के आधार पर मिलेगी सम्मान निधि
सरकार ने सम्मान निधि को हिरासत की अवधि से जोड़ते हुए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की हैं—
- 1 माह से कम अवधि तक निरुद्ध रहने पर : 8,000 रुपये प्रतिमाह
- 1 माह से 5 माह तक निरुद्ध रहने पर : 15,000 रुपये प्रतिमाह
- 5 माह से अधिक अवधि तक निरुद्ध रहने पर : 25,000 रुपये प्रतिमाह
चिकित्सा सुविधाओं का भी मिलेगा लाभ-
सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों को आर्थिक सहायता के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी प्रदान की है। पात्र लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे वृद्ध लोकतंत्र सेनानियों को विशेष राहत मिलेगी। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में इस निर्णय को आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के सम्मान और पुनर्सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले से हजारों ऐसे लोगों को पहचान और सहायता मिलेगी, जो अब तक सरकारी लाभ से वंचित थे।