जामगांव आर । पाटन अंचल में इस बार निस्तारी तालाबों में हुए भरपूर जलभराव ने ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। सिंचाई विभाग की सक्रियता और योजनाबद्ध कार्यों के चलते तांदुला जलाशय परियोजना के सबसे लंबी नहर सिपकोंहा माइनर के जरिये दक्षिण पाटन क्षेत्र के 43 गांवों के 112 निस्तारी तालाब लबालब भर गए हैं। जानकारी के अनुसार जामगांव आर, रनचिरई, बोरवाय जैसे आधा दर्जन गांव जहां टेमरी माइनर से पानी नही पहुँचता था वहाँ विभाग ने भांठागांव उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से इन गांवों तक निस्तार के लिए पर्याप्त पानी पहुंचाया गया। गर्मी के मौसम में जहां पानी की किल्लत आम बात होती है, वहीं इस बार तालाबों में भरपूर जल उपलब्ध होने से निस्तारी और सिंचाई दोनों की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं।
बताया गया कि सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई नहर प्रणाली और जल प्रबंधन की रणनीति ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। विभाग के अधीक्षण अभियंता सुरेश पाण्डेय, कार्यपालन अभियंता आशुतोष सारश्वत,एसडीओ राजेंद्र सोनी एवं सब इंजिनियर मुकेश अहीर ने फिल्ड में बेहतर समन्वय स्थापित कर नियत समय में निस्तार जल प्रबंधन के लिए सार्थक रणनीति बनाकर काम किया, इन अधिकारीयों के मुताबिक जल प्रवाह को नियंत्रित कर तालाबों तक पहुंचाने की व्यवस्था से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नहरों के माध्यम से किए गए लाइनिंग कार्य और जल के संतुलित वितरण ने तालाबों के जलभराव को स्थायी और प्रभावी बनाया है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों बाद इस तरह की व्यवस्था देखने को मिली है। यह पहल न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि भविष्य के लिए भी जल संरक्षण का मजबूत आधार तैयार कर रही है।