
पाटन से 7 किमी दूर तरीघाट स्थित स्वयंभू शिवलिंग का हजारों वर्षों से जुड़ा है इतिहास, कल्चुरीकालीन महामाया मंदिर के सामने विराजमान हैं भोलेनाथ
पाटन। विकासखंड मुख्यालय पाटन से लगभग 7 किलोमीटर दूर खारून नदी के तट पर स्थित ग्राम तरीघाट अपनी ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। गांव में स्थित प्राचीन महामाया मंदिर और उसके सामने विराजमान स्वयंभू किल्लेश्वर महादेव का शिवलिंग श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि वर्षभर श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि सावन माह में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। ग्रामीणों के अनुसार किल्लेश्वर महादेव का शिवलिंग स्वयंभू है और हजारों वर्षों से यहां विराजमान है। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन महामाया मंदिर को कल्चुरी वंश की आराध्य देवी का मंदिर माना जाता है। इसके ऐतिहासिक अवशेष आज भी क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति और स्थापत्य कला की गवाही देते हैं।
मंदिर के पुजारी दीपक वन गोस्वामी ने बताया कि प्राचीन मान्यता के अनुसार कल्चुरी वंश के राजा जगतपाल को एक रात भगवान भोलेनाथ ने स्वप्न में इस स्थान का संकेत दिया था। जब राजा यहां पहुंचे तो उन्हें स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन हुए। कहा जाता है कि शिवलिंग का आकार समय के साथ बढ़ता जा रहा था, जिसके बाद राजा जगतपाल ने यहां मंदिर का निर्माण कराया। समय बीतने के साथ मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो गया था। ग्रामीणों की आस्था और सहयोग से गांव के देवेंद्र सिन्हा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कर भव्य मंदिर का निर्माण कराया, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में सुविधा मिल रही है।
पुजारी दीपक वन गोस्वामी का कहना है कि जो भी श्रद्धालु अपनी समस्याओं और मनोकामनाओं को लेकर सच्ची श्रद्धा से भगवान किल्लेश्वर महादेव के समक्ष प्रार्थना करता है, उसकी हर मुराद भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं। यही विश्वास इस धाम को क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल करता है। सावन मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर जल अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किल्लेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उनके सभी कार्य सफल होते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण तरीघाट स्थित किल्लेश्वर महादेव धाम आज भी श्रद्धालुओं के लिए विश्वास, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।