RSS से मदद की उम्मीद : धर्मांतरण रोकने में संघ को बताया उम्मीद की किरण, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम के बयान पर सियासी घमासान

नागपुर/रायपुर।
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आदिवासी नेता और सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक अरविंद नेताम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रशिक्षण शिविर में बड़ा बयान देते हुए कहा कि “धर्मांतरण की समस्या से निपटने में संघ ही एकमात्र संस्था है, जो आदिवासी समाज की मदद कर सकती है।” यह बयान उन्होंने गुरुवार को नागपुर में संघ के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दिया।

अरविंद नेताम ने मंच से कहा, “धर्मांतरण एक गंभीर समस्या है, जिसे अब तक किसी भी सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। सिर्फ दोषारोपण का खेल चलता रहा है। संघ ही एकमात्र संस्था है जो ज़मीनी स्तर पर इस मुद्दे पर वर्षों से काम कर रही है।” उन्होंने बस्तर में नक्सलवाद और धर्मांतरण की दोहरी चुनौती का ज़िक्र करते हुए कहा कि अब समय है कि संघ और आदिवासी समाज मिलकर इस दिशा में ठोस पहल करें।

बैज बोले- संघ आदिवासियों की शुभचिंतक नहीं

पूर्व केंद्रीय मंत्री नेताम के इस बयान पर सियासत गरमा गई है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “RSS कभी भी आदिवासियों की हितैषी नहीं रही है। अरविंद नेताम संघ के संपर्क में आने के बाद उनकी भाषा और सोच बदल गई है। धर्मांतरण रोकना सरकार की जिम्मेदारी है, संघ की नहीं।”बैज ने कहा कि नेताम को जल, जंगल और जमीन की बात करनी चाहिए थी, जो आज की सबसे बड़ी जरूरत है। “बस्तर की जनता आरएसएस जैसी विचारधारा को कभी स्वीकार नहीं करेगी,” उन्होंने जोड़ा।

भाजपा का पलटवार: बैज ने खुद चर्च खुलवाए

कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा, “दीपक बैज ने खुद पांच साल बस्तर में चर्च खुलवाने में लगाए हैं। जब कार्रवाई करनी थी, तब वे चुप बैठे थे। कांग्रेस अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाली ताकतों के साथ खड़ी रहती थी।” उन्होंने कहा कि अरविंद नेताम की बातें ज़मीनी हकीकत को बयां करती हैं और संघ इस पर पहले से ही गंभीर है।

कौन हैं अरविंद नेताम?

अरविंद नेताम छत्तीसगढ़ के सबसे अनुभवी आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे चार बार सांसद रह चुके हैं और इंदिरा गांधी व नरसिम्हा राव सरकारों में मंत्री भी रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस, बसपा, भाजपा और राकांपा जैसे कई दलों में राजनीतिक सफर किया है। 2023 में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज द्वारा गठित ‘हमर राज पार्टी’ के वे प्रमुख नेता हैं।

निष्कर्ष:

अरविंद नेताम के संघ को धर्मांतरण के खिलाफ लड़ाई में साझेदार बनाने वाले बयान ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को नई दिशा दे दी है। जहां एक ओर यह बयान आदिवासी समाज और हिंदुत्ववादी संगठनों के बीच संभावित गठबंधन की ओर इशारा करता है, वहीं दूसरी ओर इससे राज्य में आदिवासी वोट बैंक की राजनीति भी गर्मा गई है।


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