दुर्ग। दुर्ग जिले में एक निलंबित शिक्षक द्वारा फर्जी तरीके से खुद की बहाली का आदेश जारी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी ने सामान्य प्रशासन विभाग के नाम से फर्जी लेटरहेड तैयार कर ई-मेल के जरिए अधिकारियों को बहाली आदेश भेज दिया। आदेश की भाषा संदिग्ध लगने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। संभागीय शिक्षा कार्यालय के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला फर्जीवाड़े का प्रतीत हो रहा है। यदि जांच में ई-मेल फर्जी साबित होता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर पुलिस को सौंपा जाएगा।
शिकायत के बाद हुआ था निलंबन
जानकारी के मुताबिक आरोपी शिक्षक शेषनारायण साहू, प्राथमिक शाला खुर्सीडीह में पदस्थ था। उसके खिलाफ हेडमास्टर द्वारा समय पर स्कूल नहीं आने, शासकीय कार्यों में सहयोग नहीं करने और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने की शिकायत की गई थी। ग्रामीणों को भड़काने और शिकायत करने की धमकी देने जैसे आरोप भी सामने आए थे। इन शिकायतों की जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद 21 जनवरी 2026 को संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग ने शिक्षक को निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि में उसका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, छुरिया (जिला राजनांदगांव) निर्धारित किया गया था।
ई-मेल से भेजा फर्जी बहाली आदेश
मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब 7 अप्रैल 2026 को ई-मेल के जरिए शिक्षक की बहाली का आदेश सामने आया। आदेश में दावा किया गया कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद निलंबन समाप्त कर दिया गया है और शिक्षक को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुपेला में पदस्थ किया गया है। यह आदेश देखने में पूरी तरह आधिकारिक प्रतीत हो रहा था, जिससे विभाग में कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति बन गई।
भाषा और शब्दावली से बढ़ा संदेह
संभागीय संयुक्त संचालक आर.एल. ठाकुर ने बताया कि ई-मेल की भाषा और शब्दावली संदिग्ध लगी। कुछ शब्द ऐसे थे, जो सामान्य शासकीय आदेशों में इस्तेमाल नहीं होते। इसके बाद संबंधित कार्यालय से आदेश की पुष्टि की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ई-मेल शिक्षक के निजी आईडी से भेजा गया था, जिससे शक और गहरा गया कि बहाली आदेश स्वयं शिक्षक द्वारा ही तैयार किया गया है।
नियमों के खिलाफ बताया गया आदेश
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी शिक्षक की बहाली तय प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से ही होती है। सामान्य प्रशासन विभाग या अन्य किसी माध्यम से सीधे बहाली आदेश जारी नहीं किया जाता। ऐसे में ई-मेल से जारी आदेश नियमों के विपरीत पाया गया है। संभागीय शिक्षा कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि ई-मेल फर्जी साबित होता है तो शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।