बिलासपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने धर्मांतरण से जुड़े मामलों में महिला उत्पीड़न की आशंका जताते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर आयोग गंभीरता से निगरानी रखता है और शिकायत मिलने पर जांच की जाती है। बुधवार को बिलासपुर प्रवास के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए किसी एक राज्य को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। हर प्रदेश की सामाजिक परिस्थितियां अलग होती हैं, कहीं मामले ज्यादा सामने आते हैं तो कहीं कम रिपोर्टिंग होती है। आयोग को देशभर से हर साल करीब एक लाख शिकायतें प्राप्त होती हैं, जिन्हें निपटाने के लिए टीम खुद राज्यों और जिलों में पहुंचकर सुनवाई करती है। बिलासपुर के प्रार्थना सभा भवन में आयोजित जनसुनवाई में आयोग ने महिलाओं से जुड़े 58 मामलों की सुनवाई की, हालांकि एक भी प्रकरण का मौके पर समाधान नहीं हो सका। अधिकांश मामलों को पुलिस, सखी वन स्टॉप सेंटर और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा गया।
सुनवाई के दौरान घरेलू विवाद, उत्पीड़न, साइबर अपराध और पुलिस कार्रवाई से असंतोष जैसे कई मुद्दे सामने आए। तखतपुर की एक युवती ने राइस मिल संचालक पर निजी फोटो और चैट वायरल करने का आरोप लगाया, जिस पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए। वहीं एक अन्य महिला ने पति द्वारा दूसरी महिला के लिए नौकरी छोड़ने और परिवार को सुविधाओं से वंचित करने की शिकायत दर्ज कराई। एक प्रकरण में बिहान कार्यकर्ता ने जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए पुलिस की लापरवाही की शिकायत की, जिस पर आयोग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। कई वैवाहिक विवादों में दोनों पक्षों को समझाइश दी गई, लेकिन तत्काल कोई समाधान नहीं निकल पाया।
अध्यक्ष रहाटकर ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता से भी जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने पुलिस और संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि महिला प्रकरणों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं और पीड़ितों को कानूनी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग भी उपलब्ध कराएं। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं को अंधविश्वास और फर्जी बाबाओं से सतर्क रहने की सलाह दी। कार्यशाला ‘शी सर्व्स’ के दौरान बेटियों को रक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही महिला समूहों को AI और डिजिटल टूल्स के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में अध्यक्ष ने प्री-मैरिटल काउंसिलिंग सेंटर स्थापित करने का सुझाव भी दिया, जिससे वैवाहिक विवादों को पहले ही कम किया जा सके। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहे।