रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पेश होते ही सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विधेयक को विजय शर्मा द्वारा सदन में प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि धर्म स्वातंत्र्य से जुड़े कई मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जिनमें विभिन्न राज्यों के कानून शामिल हैं। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले नया विधेयक लाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए चर्चा टालने की मांग की। विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई रोक नहीं लगाई गई है और राज्य सरकार को कानून बनाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने इसे राज्यहित में आवश्यक बताते हुए विधेयक पर चर्चा जारी रखने की बात कही। इसके बाद आसंदी ने विपक्ष की आपत्ति खारिज करते हुए विधेयक पर आगे की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी।
इस निर्णय के विरोध में विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति में ही सत्तापक्ष ने विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ाई। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यह विधेयक राज्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए जरूरी है। वहीं भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि धर्मांतरण के साथ-साथ “मतांतरण” भी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिससे विशेष रूप से अनुसूचित जाति, जनजाति एवं ओबीसी वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त कानून की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसी बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह विधेयक सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देगा और राज्य में सामाजिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होगा। उन्होंने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं भी दीं।
सत्तापक्ष का दावा है कि इस विधेयक से अवैध धर्मांतरण पर रोक लगेगी, वहीं विपक्ष इसे संवेदनशील मुद्दा बताते हुए विरोध कर रहा है।