रायपुर। राजधानी रायपुर में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन युवकों की दर्दनाक मौत के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। यह हादसा 18 मार्च 2026 को एक निजी अस्पताल परिसर में हुआ, जहां गटर/सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस के संपर्क में आने से तीन युवकों की जान चली गई। घटना सामने आते ही प्रदेशभर में आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर आयोग ने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए जांच प्रारंभ की है। आयोग का मानना है कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर उदासीनता को दर्शाती है।
आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक के निर्देश पर रायपुर कलेक्टर को नोटिस जारी कर एक माह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। इस रिपोर्ट में घटना के कारण, जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान, अपनाए गए सुरक्षा उपायों तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपायों की जानकारी मांगी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तीनों युवक बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के सेप्टिक टैंक में उतरे थे, जहां मौजूद जहरीली गैस के कारण वे बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर असुरक्षित सफाई कार्य और मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कार्यों में गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सपोर्ट और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य होता है, लेकिन लापरवाही के चलते नियमों की अनदेखी की जाती है, जिससे इस तरह के हादसे सामने आते हैं।
मानवाधिकार आयोग ने संकेत दिए हैं कि मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है, साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।