भिलाई। केंद्र सरकार द्वारा अप्रैल 2026 से चार श्रम संहिताओं को लागू करने के फैसले के खिलाफ देशभर में विरोध तेज हो गया है। इसी कड़ी में गुरुवार को भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य मार्ग पर सात प्रमुख यूनियनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन करते हुए मार्ग अवरुद्ध कर अपना विरोध दर्ज कराया। यूनियन नेताओं ने श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की। दरअसल, 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र फेडरेशनों और उद्योग आधारित ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। भिलाई में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, लोईमू और स्टील वर्कर्स यूनियन संयुक्त रूप से आंदोलन में शामिल हैं। यूनियनों का आरोप है कि नए श्रम कानून लागू होने से संगठित और असंगठित क्षेत्र में रोजगार की स्थिरता समाप्त हो जाएगी।
सेंट्रल ऑफ स्टील वर्कर्स एक्टू के महासचिव विजेंद्र तिवारी ने कहा कि भारत-अमेरिका डील में केंद्र सरकार ने जिस प्रकार समझौता किया है, उसे रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चारों लेबर कोड को खत्म किया जाए, ठेका प्रथा समाप्त हो, निजीकरण पर रोक लगे और देश में बढ़ रही धार्मिक विद्वेष की राजनीति बंद हो। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन को देशभर में व्यापक समर्थन मिल रहा है। भिलाई स्टील मजदूर सभा एटक के महासचिव विनोद कुमार सोनी ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड लागू होने पर कार्य अवधि 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे तक की जा सकेगी और महिला कर्मचारियों को भी रात्रि पाली में बुलाने का अधिकार प्रबंधन को मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना सूचना एक दिन अनुपस्थित रहने पर 8 दिन का वेतन काटने का प्रावधान मजदूरों के लिए दंडात्मक होगा। “यह लेबर कोड मजदूरों को गुलाम बनाने जैसा है। फैक्ट्री एक्ट में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं,” उन्होंने कहा।
लोईमू यूनियन के जनरल सेक्रेटरी सुरेंद्र मोहंती ने कहा कि 300 से कम कर्मचारियों वाले कारखानों को फैक्ट्री एक्ट के दायरे से बाहर किए जाने से स्थाई आदेश लागू नहीं होंगे और ले-ऑफ के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। उनका कहना है कि इससे स्थाई नौकरियां लगभग खत्म हो जाएंगी और कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। यूनियनों ने यह भी मुद्दा उठाया कि सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) कर्मियों का 2017 से लंबित वेतन समझौता अब तक पूरा नहीं हुआ है और 39 महीने के एरियर भुगतान पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। संयुक्त यूनियनों ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी है। इनमें चारों श्रम संहिताओं को रद्द करना, सेल कर्मियों का लंबित वेतन समझौता पूरा करना, सार्वजनिक उपक्रमों और खदानों के निजीकरण पर रोक लगाना, स्थाई भर्ती सुनिश्चित करना और सभी श्रमिकों के लिए 26 हजार रुपए प्रतिमाह राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन लागू करना प्रमुख मांगें शामिल हैं।