
गुरु-शिष्या का था अटूट रिश्ता, तीजन बाई कहा करती थीं— “मेरे बाद तुम इस कला को जीवित रखना”
जामगांव आर । पद्म विभूषण पंडवानी सम्राज्ञी डॉ. तीजन बाई की कला और विरासत को अब उनकी प्रथम शिष्या एवं सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका मीना साहू (रंगीरखी) आगे बढ़ाएंगी। भोपाल स्थित जनजातीय संग्रहालय में पंडवानी के दस्तावेजीकरण और रिकॉर्डिंग के लिए 18 जुलाई से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मीना साहू और पंडवानी गायक चेतन देवांगन अपनी प्रस्तुति देंगे। जानकारी के अनुसार जनजातीय संग्रहालय में तीजन बाई के जीवन, उनकी कापालिक और वेदमति शैली, तंबूरा, पारंपरिक आभूषण, वेशभूषा, देश-विदेश से मिले सम्मान और 118 प्रमुख प्रसंगों का स्थायी दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में 18 से 28 जुलाई तक पंडवानी की रिकॉर्डिंग और रिहर्सल होगी।
रनचिरई निवासी मीना साहू केवल तीजन बाई की शिष्या ही नहीं, बल्कि उनके परिवार जैसी थीं। दोनों ने देशभर में अनेक मंचों पर साथ-साथ पंडवानी की प्रस्तुतियां दीं। उनके बीच गहरा आत्मीय रिश्ता था। जब भी दोनों में से किसी एक की तबीयत खराब होती, दूसरी स्वयं हालचाल जानने उनके घर पहुंच जाती थीं। मीना साहू ने चर्चा में बताया कि तीजन बाई अक्सर उनसे कहा करती थीं, “मेरे जाने के बाद तुम ही इस पंडवानी कला को जीवित रखोगी।” यही विश्वास और स्नेह उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। उन्होंने बताया कि जब भी किसी कारणवश तीजन बाई किसी शासकीय या सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाती थीं, तो अपनी जगह मीना साहू को भेजती थीं। दिल्ली, अहमदाबाद, सूरजकुंड, कुरुक्षेत्र, कोलकाता सहित देश के अनेक प्रतिष्ठित आयोजनों में उन्होंने गुरु के प्रतिनिधि के रूप में पंडवानी की प्रस्तुति दी।
मीना साहू ने भावुक होकर बताया कि कुछ ही दिन पहले उनकी तीजन बाई से मुलाकात हुई थी। उसी दौरान भोपाल जाकर रिकॉर्डिंग में शामिल होने की बात हुई थी। पहले 12 जुलाई को भोपाल रवाना होने की योजना थी, लेकिन गुरु के निधन के बाद कार्यक्रम में बदलाव हुआ और अब वे 18 जुलाई को भोपाल के लिए रवाना होंगी। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्डिंग केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनकी गुरु डॉ. तीजन बाई को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके आशीर्वाद और दिखाए मार्ग पर चलते हुए वे जीवनभर पंडवानी की इस अमूल्य लोक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प निभाती रहेंगी।