
जगदलपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दो दिवसीय बस्तर दौरे के दूसरे दिन मंगलवार को जगदलपुर में 26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित की जा रही है। बस्तर के इतिहास में पहली बार इस स्तर की हाई-प्रोफाइल बैठक हो रही है, जिसमें चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो रहे हैं। बैठक की अध्यक्षता स्वयं गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। बैठक में Yogi Adityanath, Vishnu Deo Sai, Mohan Yadav और Pushkar Singh Dhami शामिल हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार सुबह जगदलपुर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव सिंह ने उनका स्वागत किया। अन्य मुख्यमंत्री सोमवार रात को ही बस्तर पहुंच चुके थे। बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण देशभर में संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा यहां मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आयोजित करना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। सरकार इसे बस्तर में बदलते हालात, सुरक्षा व्यवस्था और विकास की नई तस्वीर के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
बताया जा रहा है कि बैठक में राज्यों के बीच आपसी समन्वय, कानून-व्यवस्था, सीमावर्ती मुद्दे, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होगी। खासतौर पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर फोकस रहने की संभावना है। गृह मंत्री अमित शाह लगातार यह कहते रहे हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए निर्णायक रणनीति पर काम कर रही है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हुई है और कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
दौरे के पहले दिन सोमवार को अमित शाह नेतानार पहुंचे थे, जहां उन्होंने अमर शहीद Gundadhur को याद करते हुए कहा कि बस्तर के लोगों का 50 वर्षों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई आने वाले 4-5 वर्षों में की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक बस्तर का पूर्ण विकास नहीं होगा, तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। शाह ने यह भी घोषणा की कि गुंडाधुर की धरती को तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब बस्तर में पुलिसकर्मियों की हत्याएं होती थीं, स्कूल उजाड़ दिए जाते थे और गरीबों का राशन तक लूट लिया जाता था, लेकिन अब सरकार ने कठोर कदम उठाकर नक्सलवाद की जड़ें कमजोर कर दी हैं।
इधर, बैठक को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। Deepak Baij ने कहा कि जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, तब इतनी बड़ी बैठक वर्चुअल माध्यम से भी हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चार राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के विशेष विमानों से आने पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री स्वयं ईंधन बचाने और वर्क फ्रॉम होम की अपील करते रहे हैं। हालांकि, भाजपा और प्रशासन इसे बस्तर की बदलती पहचान और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अहमियत का प्रतीक बता रहे हैं। सरकार का कहना है कि अब बस्तर केवल संघर्ष और नक्सलवाद की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन, निवेश, विकास और प्रशासनिक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में उभरेगा।