छत्तीसगढ़ में पहली बार पुलिसकर्मियों को बिना प्रीमियम बीमा, ICJS से पुलिस-कोर्ट-जेल एक प्लेटफॉर्म पर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बिना प्रीमियम बीमा सुविधा दी जा रही है। यह जानकारी उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने नया रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में गृह एवं जेल विभाग के कामकाज को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से पुलिस, न्याय और जेल व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। गृह मंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत ICJS (इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) लागू कर पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक, जेल और न्यायालय—इन पांचों स्तंभों को एकीकृत किया गया है। दुर्ग और बिलासपुर को पायलट मॉडल जिला बनाया गया है, जहां ई-साक्ष्य प्रणाली लागू होने से जांच प्रक्रिया में तेजी आई है और सबूत तत्काल उपलब्ध हो पा रहे हैं।

पुलिसकर्मियों को पहली बार बिना प्रीमियम बीमा

विजय शर्मा ने कहा कि पहले पुलिस कर्मियों के लिए किसी प्रकार की बीमा व्यवस्था नहीं थी। अब 8 बैंकों के साथ एमओयू कर सैलरी अकाउंट के माध्यम से बिना प्रीमियम बीमा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना का लाभ छत्तीसगढ़ पुलिस के सभी अधिकारी और कर्मचारियों को मिल रहा है। अब तक 15 शहीद जवानों के परिजनों को 16 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है।

अपराध समीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन

उन्होंने बताया कि पहले अपराध समीक्षा की प्रक्रिया मैन्युअल थी, जिससे जांच में देरी होती थी। अब क्राइम रिव्यू एप्लिकेशन के जरिए पूरे प्रदेश की FIR की निगरानी, समीक्षा और विश्लेषण ऑनलाइन किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-सीमा में जांच की मॉनिटरिंग से जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

ऑनलाइन शिकायत निवारण से बदली छवि

पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट पोर्टल शुरू किया गया है। पहले शिकायतें डाक के माध्यम से भेजी जाती थीं, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। अब ऑनलाइन प्रणाली से त्वरित निराकरण संभव हुआ है, जिससे पीड़ितों को राहत और पुलिस की छवि में सुधार देखने को मिला है।

अवैध प्रवासियों, धर्मांतरण और गौ-तस्करी पर सख्ती

गृह मंत्री ने बताया कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ टोल-फ्री नंबर और विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। चार लोगों को देश से निष्कासित किया गया है तथा होल्डिंग सेंटर की व्यवस्था की गई है। धर्मांतरण के मामलों में पिछले दो वर्षों में राज्य गठन के 23 वर्षों की तुलना में दोगुने प्रकरण दर्ज हुए हैं। गौवंश वध और तस्करी के मामलों में 142 वाहन राजसात किए गए, 27 वाहनों की नीलामी की गई तथा 19 आदतन आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

नशा और साइबर अपराध पर निर्णायक कार्रवाई

NDPS एक्ट के तहत नशा कारोबारियों की संपत्ति जब्ती और नीलामी की कार्रवाई की गई है। गांजा, नशीली दवाइयां, MDMA, हेरोइन, ब्राउन शुगर और डोडा का नष्टीकरण किया गया है। ऑनलाइन फ्रॉड में संलिप्त आरोपियों के बैंक खाते सीज किए गए हैं। फर्जी सिम जारी करने वाले 165 POS संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। पहली बार 255 अवैध ऑनलाइन गैम्बलिंग लिंक और पोर्टल ब्लॉक किए गए हैं तथा 9 जिलों में साइबर थानों का संचालन शुरू हुआ है।

नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य 31 मार्च 2026

विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च 2026 का लक्ष्य तय किया है और इस दिशा में ठोस रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। पुनर्वासित नक्सलियों को आजीविका प्रशिक्षण, शासकीय योजनाओं का लाभ, 5G मोबाइल और शैक्षणिक भ्रमण की सुविधा दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे बाहरी दुनिया से संवाद स्थापित कर सकें। इलवद पंचायत योजना के तहत दो पंचायतों को नक्सल-मुक्त घोषित किया जा चुका है। जेल सुधार के तहत रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर केंद्रीय जेल को ISO प्रमाणन मिला है। अंबिकापुर जेल में ‘सरगुजा स्कूल ऑफ आर्ट्स’ तथा रायपुर केंद्रीय जेल में ‘उमंग-तरंग’ रेडियो स्टेशन संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा जेलों में मसाला निर्माण, ऑयल एक्सट्रैक्शन, LED बल्ब निर्माण और पेट्रोल पंप जैसे उद्योग स्थापित किए गए हैं। इस अवसर पर एसीएस गृह मनोज पिंगुआ, डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, सचिव हिमशिखर गुप्ता, एडीजी अमित कुमार, एडीजी एस.आर.पी. कल्लूरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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