कम बारिश में भी धान की बंपर पैदावार का फॉर्मूला, कृषि विभाग ने किसानों को दी वैज्ञानिक खेती की सलाह ! कमजोर मानसून की आशंका के बीच कृषि विभाग ने जारी की खरीफ सीजन की विशेष एडवाइजरी

कम बारिश में भी धान की बंपर पैदावार का फॉर्मूला, कृषि विभाग ने किसानों को दी वैज्ञानिक खेती की सलाह ! कमजोर मानसून की आशंका के बीच कृषि विभाग ने जारी की खरीफ सीजन की विशेष एडवाइजरी

कतार बोनी, नमी संरक्षण और नैनो डीएपी के उपयोग से बढ़ेगा उत्पादन, सूखे का असर होगा कम
रायपुर, 09 जून 2026। संभावित कमजोर मानसून और कम वर्षा की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने किसानों को वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकें अपनाने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि यदि किसान कतार बोनी, नमी संरक्षण और नैनो डीएपी जैसी तकनीकों का समन्वित उपयोग करें तो कम बारिश की स्थिति में भी धान की बेहतर पैदावार प्राप्त की जा सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अद्यतन दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने एल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून के सामान्य से कमजोर रहने तथा जून माह में कम वर्षा होने की आशंका जताई है।

इसी संभावित चुनौती को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग किसानों को जल संरक्षण आधारित खेती अपनाने के लिए जागरूक कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सीड ड्रिल के माध्यम से धान की कतार बोनी कम वर्षा की परिस्थितियों में किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कतार बोनी पद्धति में बीज निर्धारित दूरी और गहराई पर बोए जाते हैं, जिससे पौधों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित होती हैं और मिट्टी में उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग कर पाती हैं। पारंपरिक छिटकवां बुवाई की तुलना में इस पद्धति में पौधों के बीच पोषक तत्वों, पानी और सूर्य प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा कम होती है। साथ ही खरपतवार नियंत्रण और निराई-गुड़ाई भी आसान हो जाती है, जिससे खेतों में नमी लंबे समय तक संरक्षित रहती है।

कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में नैनो डीएपी के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया है। विभाग के अनुसार नैनो डीएपी में फॉस्फोरस के अति-सूक्ष्म कण होते हैं, जिन्हें पौधे आसानी से अवशोषित कर लेते हैं। इससे जड़ों का विकास तेजी से होता है, प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है तथा कम नमी की स्थिति में भी पौधों को आवश्यक पोषण मिलता है। यह तकनीक फसल की पोषक तत्व उपयोग क्षमता बढ़ाकर सूखे के प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे सीड ड्रिल के माध्यम से कतारों में बुवाई करें, खेतों में मजबूत मेड़बंदी सुनिश्चित करें ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके तथा अनुशंसित मात्रा में नैनो डीएपी, नैनो यूरिया और जैव उर्वरकों का समन्वित उपयोग करें।

विभागीय अधिकारियों ने कहा है कि खरीफ 2026 में मौसम की चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। इससे किसानों की फसल सुरक्षित रहेगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और उनकी आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। किसानों से मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करने और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का लाभ उठाने की अपील की गई है।

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