बस्तर से दिल्ली तक जनजाति समाज का हुंकार : ST सूची से धर्मांतरितों की डी-लिस्टिंग की मांग तेज-सात जिलों से पहुंचे 1200 ग्रामीण राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन

बस्तर से दिल्ली तक जनजाति समाज का हुंकार : ST सूची से धर्मांतरितों की डी-लिस्टिंग की मांग तेज-सात जिलों से पहुंचे 1200 ग्रामीण राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन

YC न्यूज़ डेस्क । अनुसूचित जनजाति सूची से धर्मांतरित परिवारों को बाहर करने की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर तेज होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से करीब 1200 जनजाति ग्रामीण दिल्ली पहुंचे हैं। बस्तर के सात जिलों से आए ये ग्रामीण “जनजाति सांस्कृतिक समागम” में शामिल होकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे और धर्मांतरित जनजातियों की डी-लिस्टिंग की मांग उठाएंगे।
जनजाति समाज का दावा है कि देशभर से करीब पांच लाख लोग इस अभियान से जुड़े हुए हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि धर्म परिवर्तन करने के बाद भी कई परिवार ST और SC आरक्षण समेत सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, जिससे मूल जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि बस्तर के गांवों में ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे जनजातीय समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक पहचान कमजोर हो रही है। कई ग्रामीणों ने गांवों में अवैध चर्च संचालन और बाहरी प्रभाव बढ़ने का भी आरोप लगाया है।

आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण का लाभ मिलना सामाजिक न्याय के खिलाफ है। उनका तर्क है कि जो लोग अपनी पारंपरिक जनजातीय आस्था और व्यवस्था छोड़ चुके हैं, उन्हें जनजातीय आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर अब डी-लिस्टिंग अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
जनजाति समाज को उम्मीद है कि केंद्र सरकार और राष्ट्रपति इस मांग पर गंभीरता से विचार करेंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा का अभियान है।

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