बघेल बनाम बघेल’ की सियासत से संसद तक : 66 के हुए सांसद विजय बघेल ! संगठन और समाज में मजबूत आधार,छत्तीसगढ़ में भाजपा की सियासत का मजबूत स्तंभ

मनीष चंद्राकर @ भिलाई। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ ऐसे नेता हैं जिनकी पहचान केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहती बल्कि वे पूरे क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय करने वाले चेहरों में शामिल हो जाते हैं। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ऐसे ही नेताओं में गिने जाते हैं। 15 मार्च को अपना 66वां जन्मदिन मना रहे विजय बघेल को प्रदेश भाजपा का वरिष्ठ नेता, दुर्ग-भिलाई क्षेत्र का मजबूत जनाधार वाला चेहरा और कुर्मी समाज के प्रभावशाली प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है जिन्होंने स्थानीय निकाय से शुरुआत कर विधानसभा और फिर लोकसभा तक का लंबा राजनीतिक सफर तय किया। वर्ष 2000 में उन्होंने भिलाई नगर परिषद में निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा और आगे चलकर 2008 में पाटन विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को हराकर बड़ी राजनीतिक पहचान बनाई। आज उनके जन्मदिन के अवसर पर भिलाई सेक्टर-5 स्थित निवास पर भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों का जमावड़ा लगा हुआ है।

स्थानीय राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर-

2000: भिलाई नगर पालिका परिषद चुनाव निर्दलीय जीतकर राजनीतिक शुरुआत
2003: पाटन विधानसभा से पहला बड़ा चुनाव
2008: पाटन से विधायक बने और भूपेश बघेल को हराकर सुर्खियों में आए
2019: दुर्ग लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से सांसद निर्वाचित
2024: दुबारा भारी मतों से जीतकर दूसरी बार सांसद बने �
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि स्थानीय राजनीति से लेकर संसद तक पहुंचना उनकी संगठन क्षमता और जनसंपर्क की मजबूत शैली को दर्शाता है।

दुर्ग-भिलाई की राजनीति में मजबूत पकड़-

दुर्ग, भिलाई और पाटन क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सबसे सक्रिय राजनीतिक भूमि मानी जाती है। इस क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों की मजबूत परंपरा रही है। विश्लेषकों के अनुसार विजय बघेल की खासियत यह रही कि उन्होंने लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर संगठन और सामाजिक नेटवर्क दोनों को मजबूत किया। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में 2019 और 2024 में उनकी बड़ी जीत को इसी जनाधार का परिणाम माना जाता है। स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव भाजपा संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के रूप में भी देखा जाता है।

भूपेश बघेल से राजनीतिक मुकाबला-

छत्तीसगढ़ की राजनीति में “बघेल बनाम बघेल” मुकाबला लंबे समय से चर्चा में रहा है।पाटन विधानसभा सीट पर विजय बघेल और भूपेश बघेल कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। 2008 में विजय बघेल ने भूपेश बघेल को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि अन्य चुनावों में दोनों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रतिद्वंद्विता ने दुर्ग-पाटन क्षेत्र को छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित राजनीतिक सीटों में शामिल कर दिया।

कुर्मी समाज में मजबूत आधार

विजय बघेल को कुर्मी समाज का प्रमुख चेहरा माना जाता है। सामाजिक संगठनों में सक्रियता और समाज से जुड़ाव के कारण उन्हें राज्य के कई हिस्सों में पहचान मिली। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सर्व कुर्मी समाज के प्रदेश अध्यक्ष है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार यही सामाजिक आधार भाजपा के लिए दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण वोट बैंक तैयार करने में मदद करता है।

संगठन और केंद्र की राजनीति में भूमिका

दुर्ग लोकसभा सांसद के रूप में विजय बघेल संसद में क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने के साथ-साथ भाजपा संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक हलकों में उन्हें “ग्राउंड कनेक्टेड लीडर” कहा जाता है, जो लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहते हैं और केंद्र सरकार की योजनाओं को क्षेत्र में लागू कराने में सक्रिय रहते हैं।

जन्मदिन पर समर्थकों का जमावड़ा

66वें जन्मदिन के अवसर पर भिलाई सेक्टर-5 स्थित उनके निवास पर सुबह से ही समर्थकों का तांता लगा हुआ है। भाजपा कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि और विभिन्न वर्गों के लोग उन्हें शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि विजय बघेल आने वाले समय में भी छत्तीसगढ़, खासकर दुर्ग-भिलाई क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *